जबलपुर के रीमा गांव की अमानवीय तस्वीर, बुनियादी सुविधाएं न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
जबलपुर के रीमा गांव में पक्की सड़क न होने के कारण एक परिवार को अपनी 11 वर्षीय मृत बच्ची का शव हाथ ठेले पर ले जाना पड़ा। बारिश के कारण रास्ता कीचड़ में बदल गया था।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रीमा से एक बेहद दिल दहला देने वाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। गांव में पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा तक न होने के कारण एक पीड़ित परिवार अपनी 11 वर्षीय मृत बच्ची के शव को एम्बुलेंस या गाड़ी के बजाय 'हाथ ठेले' पर रखकर अपने घर ले जाने को मजबूर हुआ।
🚜 कीचड़ में फंसा शव वाहन, बेबस परिजनों को मंगवाना पड़ा हाथ ठेला
मिली जानकारी के मुताबिक, ग्राम मोठार निवासी रामस्वरूप मरावी की 11 साल की मासूम बेटी माया मरावी का इलाज के दौरान जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में निधन हो गया था। गहरे शोक में डूबे परिजन बच्ची के पार्थिव शरीर को एक निजी वाहन के जरिए गांव लेकर आ रहे थे।
लेकिन, जैसे ही गाड़ी गांव के करीब पहुँची, वहाँ का कच्चा रास्ता भारी बारिश के कारण गहरे कीचड़ और दलदल में तब्दील मिला। देखते ही देखते शव वाहन उस दलदल में बुरी तरह फंस गया। काफी कोशिशों और मशक्कत के बाद भी जब गाड़ी आगे नहीं निकल पाई, तो मजबूरन वाहन को वापस लौटना पड़ा। इसके बाद अत्यंत बेबस और लाचार ग्रामीणों ने बरगी नगर से एक हाथ ठेला मंगवाया और उसी कीचड़ भरे रास्ते से होते हुए मासूम बच्ची के शव को ठेले पर रखकर बमुश्किल गांव तक पहुँचाया।
🌧️ बारिश के मौसम में हर साल दलदल बन जाता है मुख्य रास्ता
इस अमानवीय घटना से दुखी स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब से यह गांव बसा है, तब से लेकर आज तक यहाँ एक अदद पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।
हर साल बारिश के मौसम में यह कच्चा रास्ता गहरे दलदल में बदल जाता है। हालात इतने बदतर हैं कि आपातकालीन '108 एम्बुलेंस' भी गांव के भीतर आने से साफ इनकार कर देती है, और मरीजों को मजबूरन मुख्य सड़क पर ही उतारकर चली जाती है।
📢 आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस अमानवीय स्थिति और व्यवस्था की लाचारी से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द यहाँ 'ऑल वेदर' (सर्व-मौसमी) पक्की सड़क का निर्माण किया जाए।
प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने और सड़क की मांग करने वालों में मुख्य रूप से शंकर लाल वरकड़े, लेखराम, वृंदावन वरकडे, धुरन सिंह, साजन यादव, पुन्नू लाल, पंजीलाल कुलस्ते, राजू गोंड, नर्मदा प्रसाद, रतीराम, ओम सिंह, प्रकाश मसराम, वीर सिंह परस्ते, ब्रजकिशोर, महेश यादव और रंजीत मरावी सहित कई ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे मजबूरन एक बड़ा और उग्र आंदोलन करेंगे।
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