17 सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, मंत्रालय घेराव की चेतावनी
मध्य प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों ने 17 सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल में धरना दिया है। मांगें पूरी न होने पर 26 अक्टूबर को मंत्रालय का घेराव करने की चेतावनी दी गई है।
भोपाल: अपनी 17 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर मध्य प्रदेश भर के कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने रविवार को राजधानी भोपाल के शिवाजी नगर स्थित अंबेडकर मैदान में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया। भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में आयोजित इस उग्र प्रदर्शन में प्रदेशभर से लगभग 1500 से अधिक कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कर्मचारियों ने सरकार से मुख्य रूप से नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शोषणकारी ठेकेदारी व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
⚠️ मांगें पूरी न होने पर विशाल मंत्रालय घेराव की कड़ी चेतावनी
संगठन ने अपनी हुंकार भरते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तो आगामी 17 सितंबर को पूरे प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जोरदार धरना दिया जाएगा।
इसके बावजूद यदि कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो आगामी 26 अक्टूबर को प्रदेशभर के करीब दो लाख आउटसोर्स कर्मचारी भोपाल पहुंचकर मंत्रालय का घेराव करेंगे।
🗣️ "कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं"
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने कहा कि, "हमारा संगठन पिछले लगभग दस वर्षों से लगातार कर्मचारियों के अधिकारों और उनके हक के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।"
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब सरकार को जल्द से जल्द इस दिशा में उचित निर्णय लेना होगा, क्योंकि आउटसोर्स कर्मचारी अब अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
⚡ राजन नायर बोले- "बिना पूर्व सूचना के नौकरी से निकाले जा रहे हैं कर्मचारी"
मध्य प्रदेश बाह्य स्रोत विद्युत कर्मचारी संगठन के महामंत्री राजन नायर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज का यह आंदोलन तो केवल एक शुरुआत मात्र है। यदि सरकार ने समय रहते इन जायज मांगों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के आउटसोर्स कर्मचारियों को अचानक नौकरी से बाहर कर दिया जाता है और उन्हें किसी भी प्रकार की मूलभूत व चिकित्सीय सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं।
📋 राहुल मालवीय और दुर्गेश मेवाड़े ने रखी कर्मचारियों की मुख्य समस्याएं
प्रदेश सचिव राहुल मालवीय ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन हमेशा से पहले बातचीत और संवाद के माध्यम से ही हर समस्या का समाधान चाहता है, लेकिन यदि सरकार ने कोई पहल नहीं की तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को तेज किया जाएगा। उन्होंने मुख्य रूप से 60 वर्ष तक की पूर्ण सेवा सुरक्षा और एक सम्मानजनक वेतन की मांग दोहराई।
वहीं, राजगढ़ के ब्यावरा से आए मीटर रीडर दुर्गेश मेवाड़े ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर के आने से हजारों मीटर रीडरों का भविष्य आज संकट में पड़ गया है। कर्मचारियों को नई तकनीक का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है और छोटी-छोटी गलतियों पर बिना जांच के उन्हें ब्लैकलिस्ट कर नौकरी से निकाला जा रहा है। उन्होंने ठेकेदार के बिचौलिए तंत्र को समाप्त कर सीधे विभाग से वेतन भुगतान की व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई।
📌 आउटसोर्स कर्मचारियों की 10 प्रमुख और अहम मांगें
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सेवा सुरक्षा: कर्मचारियों को 60 वर्ष की आयु तक पूर्ण सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
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न्यूनतम वेतन: सभी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 30,000 रुपये मासिक वेतन अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
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निगम का गठन: आउटसोर्स निगम अथवा 'सर्विस सिक्योरिटी एक्ट' का शीघ्र गठन किया जाए।
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प्रत्यक्ष भुगतान: ठेकेदारी प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर संबंधित विभाग से कर्मचारियों को सीधे वेतन का भुगतान हो।
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समान कार्य, समान वेतन: राज्य में 'समान कार्य के लिए समान वेतन' का नियम सख्ती से लागू किया जाए।
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सामाजिक सुरक्षा: ईपीएफ (EPF), ईएसआईसी (ESIC) और दुर्घटना बीमा सहित अन्य सभी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिले।
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नौकरी समाप्ति पर रोक: बिना किसी ठोस जांच के कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
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नियमितीकरण नीति: संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक पारदर्शी नियमितीकरण नीति बनाई जाए।
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समय पर भुगतान: हर महीने समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित हो और श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन हो।
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विभागीय भर्ती में प्राथमिकता: भविष्य में होने वाली विभागीय भर्तियों में कार्यरत अनुभव के आधार पर प्राथमिकता दी जाए।
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