सरकार के प्रचार वाली योजनाएं पिछड़ीं, खसरा-खतौनी और नक्शे के लिए आए 1 लाख से अधिक आवेदन
इंदौर में आयोजित जन कल्याण शिविरों के आंकड़ों से सामने आया है कि जनता को सबसे ज्यादा जरूरत जमीन के दस्तावेज, खसरा-खतौनी और प्रमाणपत्रों की है।
इंदौर: मध्य प्रदेश सरकार जनकल्याण शिविरों को आम जनता की समस्याओं के त्वरित और सुगम समाधान का एक बड़ा माध्यम बता रही है, लेकिन इन शिविरों में आने वाले आवेदनों का जमीनी विश्लेषण प्रशासनिक व्यवस्था की एक बिल्कुल अलग तस्वीर भी हमारे सामने लाता है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन शिविरों में सबसे अधिक मांग और भीड़ केवल राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाओं की ही देखने को मिली है।
📄 खसरा-खतौनी, नक्शे और नामांतरण के लिए आए सबसे अधिक आवेदन
प्रदेश में आज भी आम आदमी की सबसे बड़ी और बुनियादी जरूरत जमीन से जुड़े सरकारी दस्तावेज और रिकॉर्ड हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, चालू खसरा-खतौनी की प्रतिलिपि, चालू नक्शा, नामांतरण और सीमांकन जैसे जरूरी कार्यों के लिए कुल 1.11 लाख से भी अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह संख्या शिविर में आने वाली किसी भी अन्य अन्य सेवा की तुलना में कई गुना अधिक है, जो यह बताने के लिए काफी है कि जमीन से जुड़े मामलों में आम जनता कितनी परेशान होती है।
📜 आय, निवास और जाति प्रमाण पत्रों की भी रही भारी मांग
राजस्व सेवाओं के ठीक बाद शिविरों में सबसे अधिक मांग विभिन्न प्रकार के शासकीय प्रमाण पत्रों को बनवाने की दर्ज की गई।
आंकड़ों के अनुसार, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र के लिए 8,451, आय प्रमाण पत्र के लिए 6,679, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाण पत्र के लिए 1,675 तथा अनुसूचित जाति व जनजाति (SC/ST) के जाति प्रमाण पत्र के लिए 1,314 आवेदन प्राप्त हुए। इससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रियाओं और अन्य जरूरी प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रमाण पत्रों की आवश्यकता लगातार बनी हुई है।
🏥 स्वास्थ्य और प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाएं पिछड़ीं
यह एक बेहद दिलचस्प तथ्य है कि जिन कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार सरकार द्वारा सबसे अधिक जोर-शोर से किया जाता है, उन योजनाओं के लिए इन शिविरों में आवेदन अपेक्षाकृत काफी कम संख्या में पहुंचे।
उदाहरण के तौर पर, आयुष्मान भारत योजना के लिए केवल 840, समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 575, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 558 और लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए मात्र 315 आवेदन ही दर्ज किए जा सके।
📊 शिविरों में प्राप्त आवेदनों के प्रमुख आंकड़े एक नजर में
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खसरा-खतौनी की प्रति: 56,917 आवेदन
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चालू नक्शा: 48,172 आवेदन
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स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र: 8,451 आवेदन
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आय प्रमाण पत्र: 6,679 आवेदन
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अविवादित नामांतरण: 3,349 आवेदन
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सीमांकन: 2,848 आवेदन
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आयुष्मान भारत योजना: 840 आवेदन
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सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 575 आवेदन
🔍 क्या कहते हैं ये आंकड़े? (प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवाल)
जनकल्याण शिविरों के ये तमाम आंकड़े सीधे तौर पर यह इशारा करते हैं कि मध्य प्रदेश में आम नागरिक की प्राथमिक जरूरत आज भी जमीन के रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन और जरूरी प्रमाण पत्र प्राप्त करना ही है।
यह इस बात का भी साफ संकेत है कि हमारी नियमित राजस्व और प्रशासनिक सेवाओं की व्यवस्था में ऐसी कई व्यावहारिक बाधाएं और कमियां मौजूद हैं, जिनके कारण आम जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए विशेष शिविरों का इंतजार करना पड़ता है और उनका सहारा लेना पड़ता है। यदि ये सभी बुनियादी सेवाएं आम नागरिकों को समयबद्ध तरीके से और पूरी सहजता के साथ मिल सकें, तो शायद ऐसे शिविरों में इन कामों के लिए इतनी भारी भीड़ और लाखों की संख्या में आवेदन आने की आवश्यकता ही न पड़े।
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