वसीयत के विवाद पर राजस्व अधिकारी नहीं कर सकते भूमि का नामांतरण, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि वसीयत की वैधता को लेकर विवाद होने पर राजस्व अधिकारी भूमि का नामांतरण नहीं कर सकते।
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी संपत्ति की वसीयत की वैधता को लेकर आपसी विवाद या संदेह पैदा होता है, तो राजस्व अधिकारी केवल उस वसीयत के आधार पर भूमि का नामांतरण (Mutation) नहीं कर सकते हैं।
⚖️ अधिकारों की घोषणा के लिए पक्षकारों को जाना होगा सिविल कोर्ट
अदालत ने कहा है कि इस तरह के कानूनी मामलों में संबंधित पक्षकारों को अपने मालिकाना हक और अधिकारों की औपचारिक घोषणा कराने के लिए सिविल कोर्ट की शरण लेनी होगी।
यह अहम आदेश न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ द्वारा बैतूल जिले के एक मामले—'रम्प्यारी एवं अन्य बनाम बसंती सहित अन्य'—की सुनवाई के दौरान पारित किया गया है।
📍 बैतूल जिले के ग्राम सकड़ेही की भूमि से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा कानूनी विवाद मूल रूप से बैतूल जिले के ग्राम सकड़ेही और उसके आसपास के क्षेत्रों की कृषि भूमि से जुड़ा हुआ है।
याचिकाकर्ता रम्प्यारी (पत्नी सज्जनलाल), मुकेश (पुत्र सज्जनलाल) और सरबतिबाई (पत्नी मिस्त्री) ने 11 जनवरी 1989 की एक कथित वसीयत के आधार पर विवादित भूमि पर अपने नाम नामांतरण का दावा पेश किया था। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार मिश्रा ने पैरवी की, जबकि प्रतिवादियों की तरफ से अधिवक्ता रवींद्र कुमार तिवारी उपस्थित हुए।
❌ प्रतिवादियों ने वसीयत को बताया था फर्जी, बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने निरस्त किए थे आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी बसंती एवं अन्य ने इस वसीयत को सिरे से अस्वीकार करते हुए इसे पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत बताकर चुनौती दी थी।
इसके बावजूद, शुरुआती स्तर के राजस्व अधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में नामांतरण संबंधी आदेश पारित कर दिए थे। हालांकि, बाद में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (Board of Revenue) ने इन सभी आदेशों को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया था, जिसके खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंचा था।
📜 'आनंद चौधरी' फुल बेंच के फैसले का दिया गया हवाला
हाई कोर्ट ने इस मामले में 'आनंद चौधरी बनाम मध्य प्रदेश शासन' के मामले में आए फुल बेंच के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दिया।
अदालत ने कहा कि हालांकि राजस्व अधिकारी नामांतरण की संक्षिप्त कार्यवाही के दौरान वसीयत के आधार पर दिए गए आवेदन को देख सकते हैं, लेकिन यदि वसीयत की वैधता पर वास्तविक और गंभीर विवाद खड़ा हो जाता है, तो उसका वैधानिक निर्णय लेने का अधिकार उनके पास नहीं होता है।
🏛️ राजस्व अधिकारियों का नामांतरण आदेश था अधिकार क्षेत्र से बाहर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजी पक्षकारों के वास्तविक अधिकारों का निर्धारण केवल सिविल कोर्ट ही कर सकता है।
इस प्रकार विवादित वसीयत के आधार पर राजस्व अधिकारियों द्वारा किया गया नामांतरण का आदेश उनके अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर था। इसलिए, बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा पूर्व के उन त्रुटिपूर्ण आदेशों को निरस्त किया जाना पूरी तरह से उचित और कानून सम्मत है।
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