धार रोड नए जिला अस्पताल की खुली पोल, हाथी के हमले से घायल ऑटो चालक को नहीं मिला इलाज, मौत
इंदौर के नए जिला अस्पताल में हाथी के हमले से घायल ऑटो चालक को इलाज नहीं मिलने और एमवाय अस्पताल रेफर किए जाने का मामला सामने आया है। इलाज के अभाव में घायल की मौत हो गई।
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर स्थित धार रोड पर बने नए जिला अस्पताल को करीब 83 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ तैयार किया गया था, ताकि क्षेत्र के गंभीर मरीजों को त्वरित और बेहतर उपचार मिल सके। लेकिन, अस्पताल के संचालन में आने के कुछ ही दिन बाद सामने आए एक बेहद संवेदनशील और लापरवाही से भरे मामले ने इसकी तमाम व्यवस्थाओं और दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🐘 हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल हुआ था ऑटो चालक
यह दुखद घटना 25 जुलाई की शाम करीब साढ़े चार बजे राजनगर पुलिस चौकी के सामने हुई थी। 49 वर्षीय ऑटो चालक विजय होलकर एक हाथी को गुड़ खिला रहे थे।
इसी दौरान अचानक हाथी ने उन पर आक्रामक हमला कर दिया। परिजनों के अनुसार, हाथी ने उन्हें अपने पैरों तले कुचल दिया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी रीढ़ की हड्डी और कमर की कई हड्डियां बुरी तरह टूट गईं। गंभीर हालत में परिजन उन्हें तुरंत ऑटो से बैठाकर सीधे नए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
⏳ आधे घंटे तक अस्पताल परिसर में दर्द से तड़पता रहा घायल, नहीं मिली एंबुलेंस
मृतक के छोटे भाई संजय होलकर ने दर्द बयां करते हुए बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों को जब हाथी के हमले और गंभीर स्थिति की जानकारी दी गई, तो उन्होंने बिना ठीक से जांच किए कह दिया कि यहाँ इस तरह के गंभीर मरीजों के इलाज की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें तुरंत एमवाय अस्पताल (MY Hospital) ले जाना होगा।
परिजनों का गंभीर आरोप है कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से तुरंत एंबुलेंस उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, लेकिन करीब आधे घंटे तक न तो कोई एंबुलेंस मिली और न ही मरीज के लिए स्ट्रेचर तक उपलब्ध कराया गया। इस बीच घायल विजय होलकर अस्पताल के परिसर में ही दर्द से बुरी तरह कराहते रहे।
🏥 प्राइवेट अस्पताल ले जाने के दौरान तोड़ा दम, प्रशासन पर फूटा गुस्सा
संजय के अनुसार, एंबुलेंस और डायल-112 पर कई बार कॉल करने के बावजूद जब कोई मदद नहीं पहुंची, तो मजबूर होकर परिजन घायल को अपने ही ऑटो से नजदीक स्थित 'वर्मा यूनियन अस्पताल' लेकर भागे।
वहाँ डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने की कोशिश की, लेकिन शाम करीब 7:15 बजे विजय होलकर ने दम तोड़ दिया और उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि नए जिला अस्पताल में समय रहते प्राथमिक उपचार और तत्काल चिकित्सीय मदद मिल जाती, तो शायद विजय की जान बचाई जा सकती थी। उनका सीधा सवाल है कि यदि करोड़ों रुपए खर्च करके बने इस नए अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज की ही व्यवस्था नहीं है, तो आम गरीब जनता को इससे क्या लाभ मिलेगा।
💰 अब तक किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं, परिवार बेसहारा
संजय होलकर ने जानकारी दी कि इस हृदयविदारक हादसे के बाद से अब तक न तो कोई जनप्रतिनिधि उनके परिवार का हाल जानने पहुंचा है और न ही जिला प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।
मृतक विजय अपने पीछे अपनी पत्नी, 11 साल के मासूम बेटे और बुजुर्ग मां को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं। पूरे परिवार की आजीविका केवल सिलाई और ऑटो चलाने पर ही निर्भर थी। शोकाकुल परिजनों ने अब सरकार से उचित आर्थिक मुआवजे और इस पूरी लापरवाही की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
⚠️ बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की खुली पोल
इस नए जिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर आसपास के क्षेत्र के लोगों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे।
अस्पताल के शुरू होने के बाद यह उम्मीद बंधी थी कि अब गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा और बार-बार दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर करने की स्थिति खत्म होगी। हालांकि, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)