इंदौर में लगे शिविरों में राजस्व सेवाओं की सबसे ज्यादा मांग, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाएं रहीं पीछे

मध्य प्रदेश के जनकल्याण शिविरों के आंकड़ों से सामने आया है कि जनता को सबसे ज्यादा जरूरत जमीन के दस्तावेज, खसरा-खतौनी और प्रमाणपत्रों की है।

Aug 03, 2026 - 15:43
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इंदौर में लगे शिविरों में राजस्व सेवाओं की सबसे ज्यादा मांग, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाएं रहीं पीछे

इंदौर: मध्य प्रदेश सरकार भले ही जनकल्याण शिविरों को आम जनता की समस्याओं के त्वरित और आसान समाधान का एक बेहतरीन माध्यम बता रही हो, लेकिन इन शिविरों में आए आवेदनों और आंकड़ों का विश्लेषण प्रशासनिक व्यवस्था की एक बिल्कुल अलग और हकीकत बयां करती तस्वीर सामने लाता है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन शिविरों में सबसे अधिक मांग और भीड़ राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाओं के लिए देखने को मिली है।

📄 खसरा-खतौनी, नक्शा और नामांतरण के लिए सबसे ज्यादा आए आवेदन

प्रदेश में आम लोगों की सबसे बड़ी जरूरत आज भी जमीन से जुड़े दस्तावेज और उनके रिकॉर्ड हासिल करना बनी हुई है।

आंकड़ों के गवाह के मुताबिक, चालू खसरा-खतौनी की प्रतिलिपि, चालू नक्शा, नामांतरण और सीमांकन जैसे जरूरी कार्यों के लिए सबसे ज्यादा आवेदन दर्ज किए गए। अकेले खसरा-खतौनी, चालू नक्शे, नामांतरण और सीमांकन के लिए कुल 1.11 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। यह संख्या किसी भी अन्य सरकारी सेवा या योजना की तुलना में सबसे अधिक है।

📜 प्रमाणपत्रों की भी रही भारी मांग, नागरिकों को पड़ी जरूरत

राजस्व सेवाओं के बाद जनकल्याण शिविरों में सबसे अधिक मांग विभिन्न प्रकार के शासकीय प्रमाणपत्रों को बनवाने के लिए रही।

आंकड़ों के अनुसार, स्थानीय निवासी प्रमाणपत्र के लिए 8,451, आय प्रमाणपत्र के लिए 6,679, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाणपत्र के लिए 1,675 तथा अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) के जाति प्रमाणपत्र के लिए 1,314 आवेदन दर्ज किए गए। इससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकारी योजनाओं के लाभ, शैक्षणिक प्रवेश प्रक्रियाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए जरूरी प्रमाणपत्रों की आवश्यकता नागरिकों को लगातार बनी रहती है।

🏥 स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं रहीं काफी पीछे

इस पूरी रिपोर्ट का एक सबसे दिलचस्प और सोचने पर मजबूर करने वाला तथ्य यह है कि जिन कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार सरकार द्वारा सबसे अधिक किया जाता है, उनके लिए आवेदन अपेक्षाकृत काफी कम संख्या में पहुंचे।

उदाहरण के तौर पर, आयुष्मान भारत योजना के लिए 840, समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 575, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 558 और लोकप्रिय लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए मात्र 315 आवेदन ही दर्ज किए जा सके।

📊 शिविरों में विभिन्न सेवाओं के लिए आए कुल आवेदन
  • खसरा-खतौनी की प्रति: 56,917 आवेदन

  • चालू नक्शा: 48,172 आवेदन

  • निवासी प्रमाणपत्र: 8,451 आवेदन

  • आय प्रमाणपत्र: 6,679 आवेदन

  • अविवादित नामांतरण: 3,349 आवेदन

  • सीमांकन: 2,848 आवेदन

  • आयुष्मान भारत योजना: 840 आवेदन

  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 575 आवेदन

🔍 क्या बयां करते हैं ये आंकड़े?

जनकल्याण शिविरों के ये तमाम आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि मध्य प्रदेश में आम नागरिक की पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता आज भी जमीन के रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन और जरूरी शासकीय प्रमाणपत्र प्राप्त करना ही है।

यह इस बात का भी साफ संकेत देता है कि हमारी राजस्व और प्रमाणपत्र से जुड़ी सामान्य दैनिक सेवाओं की नियमित व्यवस्था में ऐसी कई व्यावहारिक बाधाएं और जटिलताएं हैं, जिनके कारण आम जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भी विशेष शिविरों का सहारा लेने पर मजबूर होना पड़ता है। यदि ये सभी बुनियादी सेवाएं समयबद्ध, पारदर्शी और सहजता से ऑनलाइन या कार्यालयों में मिलने लगें, तो शायद ऐसे शिविरों में इन कामों के लिए इतनी भारी भीड़ और लाखों आवेदन आने की आवश्यकता ही न पड़े।

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