सावन के पहले सोमवार पर धूमधाम से निकली बाबा महाकाल की सवारी, चंद्रमौलेश्वर रूप में दिए दर्शन
सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी धूमधाम से निकाली गई। भगवान महाकाल 'चंद्रमौलेश्वर' रूप में पालकी में सवार होकर प्रजा को दर्शन देने निकले।
सावन मास के पवित्र और पावन पहले सोमवार के अवसर पर आज बाबा महाकाल की भव्य सवारी पूरी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। भगवान महाकाल ‘चंद्रमौलेश्वर’ के अलौकिक रूप में चांदी की पालकी में विराजमान होकर अपनी प्रजा को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकले। इस पालकी के ठीक पीछे हाथी पर भगवान ‘मनमहेश’ की मनमोहक प्रतिमा भी सुसज्जित होकर विराजित थी।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष भी महाकाल की सभी सवारियों के लिए अलग-अलग अनूठी थीम निर्धारित की गई हैं। इस क्रम में पहली सवारी के दौरान बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रों का भव्य उद्घोष किया गया, और आने वाली प्रत्येक सवारी में अलग-अलग थीम व अद्भुत भव्यता के साथ बाबा महाकाल अपने भक्तों को दर्शन देंगे।

🍲 कावड़ यात्रियों के लिए निःशुल्क भोजन और कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त
इस वर्ष सावन मास में दूर-दूर से आने वाले कावड़ यात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर समिति की ओर से इंदौर-उज्जैन-देवास-बड़नगर मार्ग पर निःशुल्क भोजन प्रसादी की विशेष व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा, सावन के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और सुरक्षा-व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के लिए मंदिर समिति के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की छुट्टियां आगामी आदेश तक निरस्त कर दी गई हैं। आपको बता दें कि इस विशेष अवसर पर सोमवार की अल सुबह रात 2:30 बजे ही महाकाल मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे, जिसके बाद से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा हुआ है।

🙏 ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष से शिवमय हुई उज्जैन नगरी
पूरी उज्जैन नगरी इस समय ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय महाकाल’ के जयकारों से पूरी तरह शिवमय नजर आ रही है।
बाबा महाकाल के मनमहेश रूप के सबसे पहले दर्शन पाने के लिए हजारों की संख्या में भक्त अपनी जगह दो घंटे पहले से ही सड़कों के दोनों ओर कतारबद्ध होकर खड़े हो गए थे। सवारी के प्रस्थान से पहले मंदिर के पारंपरिक सभा मंडप में विधि-विधान से पालकी का पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात सवारी महाकाल चौराहे से होते हुए गुदरी चौराहा, कार्तिक चौक और हरसिद्धि की पाल से गुजरते हुए पवित्र रामघाट पहुँची।
🌊 शिप्रा तट पर अभिषेक और सवारियों का संपूर्ण क्रम
पवित्र शिप्रा नदी के तट पर पहुँचने के बाद माँ क्षिप्रा के जल से बाबा महाकाल का विशेष अभिषेक और पूजन संपन्न हुआ, जिसके बाद सवारी पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस लौट आई।
सनातन परंपरा के अनुसार, सावन मास के प्रत्येक सोमवार को महाकाल राजा की सवारी निकालने का विधान है। इस वर्ष सावन माह में कुल 4 और भादौ माह में 2 सवारियां निकाली जाएंगी।

निकलने वाली इन भव्य सवारियों का आधिकारिक और सुव्यवस्थित क्रम इस प्रकार रहेगा:
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मजिस्ट्रेट वाहन और मंदिर का प्रचार वाहन
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यातायात पुलिस, तोपची (कड़ाबीन) और घुड़सवार दल
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विशेष सशस्त्र बल एवं नगर सेना के सलामी गार्ड्स
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पुलिस बैंड, स्काउट गाइड सदस्य और कांग्रेस सेवा दल
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लगभग 70 भजन मंडलियां और जनजातीय लोक कला नृत्य दल
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श्री महाकालेश्वर मंदिर का मुख्य बैंड और भगवान श्री महाकालेश्वर जी की रजत पालकी
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एंबुलेंस, मध्य प्रदेश राज्य विद्युत मंडल का वाहन, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहन
🎨 विभिन्न थीमों के जरिए सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश
श्रावण और भादौ मास के इस पावन काल में भगवान श्री महाकालेश्वर की नगर भ्रमण सवारियों को अधिक भव्य, आकर्षक और जन-जागरूकता से जोड़ने के उद्देश्य से प्रत्येक सवारी के लिए एक विशेष थीम तय की गई है।
इन अनूठी थीमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश दिए जाएंगे। साथ ही, मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले पारंपरिक जनजातीय नृत्य दल प्रत्येक सवारी में अपनी मनोहारी प्रस्तुतियां देकर समां बांधेंगे।

🛣️ सवारी का निर्धारित पारंपरिक मार्ग और शाही सवारी
श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर से निर्धारित समयानुसार सवारी प्रस्थान करेगी और गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी से होते हुए रामघाट शिप्रा तट पहुँचेगी।
वहाँ पूजन-अर्चन संपन्न होने के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होती हुई वापस श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रवेश करेगी।
इसके अलावा, आगामी 2 सितंबर को निकलने वाली विशेष शाही सवारी अपने सामान्य मार्ग के अतिरिक्त टंकी चौराहा से मिर्जा नईमबेग, तेलीवाड़ा चौराहा, कंठाल, सतीगेट, सराफा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार से होते हुए मंदिर पहुँचेगी।
📏 ढाई किलोमीटर का सफर तय करेंगे बाबा महाकाल
भगवान महाकालेश्वर की पहली सवारी 3 अगस्त को निकाली गई है, जबकि इस वर्ष की अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को संपन्न होगी।
मंदिर प्रांगण से आरंभ होने वाली यह सवारी लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करके शाम 5 बजे रामघाट पहुँचेगी। रामघाट पर शिप्रा जल से अभिषेक, पूजन और आरती के बाद बाबा अपने भक्तों को लगभग ढाई किलोमीटर लंबे मार्ग पर दर्शन देते हुए वापस मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे और शाम 7 बजे मंदिर लौटेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रत्येक सवारी में 5 अत्याधुनिक एलईडी रथ शामिल किए गए हैं, तथा स्वास्थ्य सेवाओं के मद्देनजर 15 प्रमुख स्थानों पर विशेष मेडिकल टीमें और 24×7 एंबुलेंस की मुस्तैद व्यवस्था की गई है।
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