लाडली बहनों को 15 अगस्त तक मिलेगी 39वीं किस्त, शगुन के रूप में मिलेंगे अतिरिक्त 250 रुपये
मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना की 39वीं किस्त 15 अगस्त तक खातों में आएगी। रक्षाबंधन शगुन के रूप में 250 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे और योजना के प्रभाव का अध्ययन होगा।
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की करीब सवा करोड़ लाडली बहनों को अब तक कुल 61 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर कर चुकी है। इसी कड़ी में अब सरकार योजना की 39वीं किस्त की राशि आगामी 15 अगस्त तक लाडली बहनों के बैंक खातों में डालने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा, आगामी रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार को विशेष बनाते हुए सरकार इस माह लाडली बहनों को शगुन के रूप में 250 रुपए की अतिरिक्त राशि भी उपहारस्वरूप देने की योजना बना रही है। खास बात यह है कि सरकार अब इस बात का व्यापक अध्ययन (Study) कराने जा रही है कि महिलाओं को हर माह दी जाने वाली इस आर्थिक सहायता से उनके जीवन में असल मायनों में किस तरह के सामाजिक और आर्थिक बदलाव आए हैं।
📊 अध्ययन के जरिए इन महत्वपूर्ण सवालों के खोजे जाएंगे जवाब
देश के कई अन्य राज्यों में भी लाडली बहना की तर्ज पर विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मध्य प्रदेश में इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत मई 2023 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की गई थी।
शुरुआत में इस योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 1,250 रुपए मासिक और तदुपरांत नवंबर 2025 में बढ़ाकर 1,500 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया। प्रदेश सरकार जुलाई 2026 तक 61 हजार करोड़ रुपए से अधिक की भारी-भरकम राशि लाडली बहनों के खातों में पहुँचा चुकी है। हालांकि, अब यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि हर महीने महिलाओं के खातों में पहुँचने वाली 1,800 करोड़ रुपए से ज्यादा की यह राशि उनके जीवन स्तर को किस प्रकार प्रभावित कर रही है। इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित 'अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान' के माध्यम से इस योजना का विस्तृत सामाजिक और आर्थिक प्रभाव अध्ययन कराया जाएगा। इस रिसर्च के जरिए सरकार कई बड़े सवालों के सटीक उत्तर तलाशने का प्रयास करेगी, जैसे—महिलाएं इस राशि का उपयोग किन कार्यों में कर रही हैं, इससे उनके व्यक्तिगत जीवन में क्या आर्थिक बदलाव आए हैं, और इसका समग्र पारिवारिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है।
🛍️ क्या इस योजना से बदल चुकी हैं घरेलू खर्च की प्राथमिकताएं?
इस प्रस्तावित अध्ययन के दौरान मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा कि महिलाओं को हर महीने मिलने वाली 1,500 रुपए की इस राशि से उनके घरेलू खर्च की प्राथमिकताओं में कितना बदलाव आया है।
क्या इस आर्थिक मदद के जरिए महिलाओं के लिए स्वरोजगार (Self-Employment) या छोटे-मोटे व्यवसायों के नए रास्ते खुले हैं? साथ ही यह भी परखा जाएगा कि घर के बड़े वित्तीय निर्णयों में महिलाओं की स्वतंत्र भागीदारी और निर्णय क्षमता में कितनी वृद्धि हुई है। चूंकि मध्य प्रदेश में इस योजना को सफलतापूर्वक संचालित होते हुए अब दो साल से अधिक का वक्त बीत चुका है, इसलिए शासन का यह मानना है कि जमीनी स्तर पर आए सकारात्मक बदलावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना बेहद जरूरी है।
📈 अन्य राज्यों में पहले ही हो चुके हैं इस तरह के प्रभाव अध्ययन
भले ही मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में ऐसी योजनाएं कुछ समय बाद शुरू हुईं, लेकिन इन राज्यों में महिलाओं के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन पहले ही कराया जा चुका है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद द्वारा महाराष्ट्र की 'माझी लाड़की बहीण योजना' और ओडिशा की 'सुभद्रा योजना' का वैज्ञानिक प्रभाव अध्ययन पूर्व में ही प्रकाशित किया जा चुका है। उस अध्ययन के निष्कर्षों में यह बात सामने आई थी कि इस तरह की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजनाओं से महिलाओं के व्यक्तिगत बैंक खातों में बचत (Savings) की प्रवृत्ति बढ़ी है, और साथ ही उनके मासिक व पारिवारिक खर्चों के पैटर्न में भी सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है।
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