एक ही पत्थर से तराशा गया है रायसेन का प्रसिद्ध भोजेश्वर शिवलिंग, जानिए इस ऐतिहासिक मंदिर का इतिहास

सावन के पहले सोमवार पर मध्य प्रदेश के रायसेन और छतरपुर में शिवालयों में भारी भीड़ उमड़ी। भोजपुर के ऐतिहासिक मंदिर और रुद्राभिषेक के महत्व के बारे में जानें।

Aug 03, 2026 - 19:52
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एक ही पत्थर से तराशा गया है रायसेन का प्रसिद्ध भोजेश्वर शिवलिंग, जानिए इस ऐतिहासिक मंदिर का इतिहास

छतरपुर: सावन का पवित्र महीना आते ही देश भर के प्राचीन मंदिरों और शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सीधे दोगुनी हो जाती है। हर तरफ लोग भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक करने के लिए मंदिरों का रुख कर रहे हैं। आज सावन का पहला सोमवार होने के कारण यह संख्या और भी अधिक बढ़ गई है। रायसेन से लेकर छतरपुर तक चारों तरफ ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के रायसेन में स्थित पवित्र भोजेश्वर महादेव के अलौकिक शिवलिंग के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुँच रहे हैं, और कुछ ऐसा ही भव्य व आस्थामय नजारा छतरपुर के तमाम शिवालयों में भी देखने को मिल रहा है।

🪨 एक ही विशाल पत्थर से तराशा गया है ऐतिहासिक भोजेश्वर शिवलिंग

रायसेन में स्थित प्रसिद्ध भोजेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण परमार कालीन प्रतापी राजा भोज द्वारा 1000 ईस्वी से 1050 ईस्वी के मध्य करवाया गया था।

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, यह दुनिया के उन चुनिंदा अनूठे शिवलिंगों में से एक है, जिसे एक ही विशाल अखंड पत्थर से तराश कर तैयार किया गया है। यही वजह है कि इस अद्भुत शिवलिंग के दर्शन करने के लिए देश-विदेश से लोग खिंचे चले आते हैं। इसके अलावा, रायसेन के प्राचीन दुर्ग पर ऐतिहासिक ‘सोमेश्वर महादेव’ का शिव मंदिर भी स्थित है, जहाँ वर्ष में केवल एक बार महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर ही मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। बाकी के पूरे साल इस मंदिर के पट बंद रहते हैं और श्रद्धालुओं को मंदिर के बाहरी हिस्से से ही भगवान शिव के दर्शन करने होते हैं। हालांकि, लंबे समय से स्थानीय शिव भक्त इस ऐतिहासिक मंदिर के नियमित ताले खुलवाने की पुरजोर मांग करते आ रहे हैं।

📜 प्राचीन काल का ‘मध्य का सोमनाथ’ कहलाता है भोजपुर मंदिर

भोजपुर के इस प्राचीन शिव मंदिर को ऐतिहासिक काल में ‘मध्य का सोमनाथ’ कहा जाता था। धार के महान राजा भोज द्वारा इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया था।

यह मंदिर एक विशाल ऊंचे चबूतरे पर स्थित है, जिसकी ऊँचाई लगभग 3.85 मीटर है। यह मंदिर मूल रूप से एक 18.5 मील लंबे और 7.5 मील चौड़े प्राचीन सरोवर के सुंदर तट पर बना हुआ है। इस मंदिर में स्थापित भगवान शिव के इस विशाल शिवलिंग की कुल ऊँचाई लगभग 40 फीट यानी 12 मीटर के आसपास है।

🛡️ श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

मंदिरों में लगातार पहुँच रहे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक नायक ने जानकारी देते हुए बताया कि, "सावन के इस पवित्र माह में भारी संख्या में श्रद्धालु रायसेन जिले के विभिन्न ऐतिहासिक और पवित्र शिव देव स्थलों पर पहुँच रहे हैं। जिनकी सुरक्षा और सुगमता को ध्यान में रखते हुए रायसेन पुलिस पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात है।" उन्होंने बताया कि तमाम प्रमुख देव स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, साथ ही महिला श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए पुलिस जवानों के साथ महिला कांस्टेबलों की भी विशेष तैनाती की गई है।

🌸 छतरपुर के शिवालयों में भी उमड़ी भीड़, महिलाओं ने किया जलाभिषेक

यदि बात छतरपुर जिले की की जाए, तो यहाँ भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के मंदिरों और शिवालयों में सुहागिन महिलाओं के साथ-साथ कुंवारी कन्याओं और पुरुषों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

श्रद्धालु महिलाओं ने भगवान शिव को भांग, धतूरा, मदार के फूल, बेलपत्र, शुद्ध घी, दूध, दही, शहद (मधु), अक्षत (चावल) और पवित्र गंगाजल सहित भोलेनाथ की सभी प्रिय सामग्रियां अर्पित कर विधि-विधान से जलाभिषेक किया। इस दौरान महिलाओं ने क्षेत्र में अच्छी बारिश और फसलों की खुशहाली के लिए विशेष कामना भी की।

🕉️ सावन में रुद्राभिषेक और पार्थिव शिवलिंग निर्माण का विशेष महत्व

हिंदू धर्म और पुराणों के अनुसार, सावन के पूरे महीने में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना अत्यंत फलदायी और विशेष महत्व रखता है।

पंडित सौरभ तिवारी बताते हैं कि, "शिवलिंग पर वैदिक मंत्रों के सस्वर उच्चारण के साथ विभिन्न पवित्र द्रव्यों को अर्पित करने की प्रक्रिया को ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। रुद्राभिषेक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, सुख-शांति आती है और मानसिक तनावों से मुक्ति मिलती है।"

अलग-अलग सामग्रियों से अभिषेक करने पर अलग फल प्राप्त होते हैं; सावन में केवल जल और गंगाजल से रुद्राभिषेक करने से मानसिक शांति, तनाव से मुक्ति और सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। इसके साथ ही, सावन मास में मिट्टी का ‘पार्थिव शिवलिंग’ बनाकर उसकी पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ माना गया है। हाथों से पवित्र मिट्टी के शिवलिंग को गढ़कर विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। शिवलिंग के निर्माण, उसकी विधिवत पूजा, विसर्जन और विभिन्न द्रव्यों से होने वाले अभिषेक के इन सभी विशेष धार्मिक महत्वों का विस्तृत उल्लेख हमारे शिवपुराण में भी विस्तार से मिलता है।

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