नाबार्ड और CIDA का MEDP प्रोग्राम लाया रंग; खेती के साथ बिजनेस सीखकर स्वावलंबी बनीं सागर की महिलाएं

सागर के कनेरा गांव में नाबार्ड और CIDA के MEDP प्रशिक्षण से महिला किसानों ने फूलों की खेती और मार्केट टाइमिंग सीखकर त्योहारी सीजन में दोगुनी कमाई की।

Sep 18, 2026 - 16:25
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नाबार्ड और CIDA का MEDP प्रोग्राम लाया रंग; खेती के साथ बिजनेस सीखकर स्वावलंबी बनीं सागर की महिलाएं

सागर। वैसे तो सरकार और विभिन्न सामाजिक संस्थान महिलाओं के स्वरोजगार के लिए कई तरह के प्रशिक्षण आयोजित करते हैं, लेकिन ट्रेनिंग के बाद व्यवसाय और बाजार के उतार-चढ़ाव को समझने का हुनर न होने के कारण महिलाएं अक्सर अपने उत्पादों का सही दाम हासिल नहीं कर पाती हैं।

हालांकि, सागर जिले के जैसीनगर विकासखंड स्थित कनेरा गांव में यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। यहां सेंटर फॉर इनोवेशन्स एंड डेवलपमेंट असिस्टेंस (CIDA) द्वारा नाबार्ड (NABARD) के वित्तीय सहयोग से आयोजित सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रम (MEDP) के अंतर्गत महिला किसानों को फूलों की उन्नत खेती के साथ-साथ बाजार व विपणन (मार्केटिंग) की व्यावहारिक समझ भी दी गई। इसका शानदार परिणाम यह रहा कि महिलाओं ने त्यौहारी सीजन को ध्यान में रखकर फूलों की तुड़ाई व बिक्री की और आज वे गेंदे के फूलों से दोगुनी कमाई कर रही हैं।

🌼 त्यौहारी सीजन में गेंदे के फूलों से हुई बंपर कमाई: तीज और गणेश उत्सव पर मिला ₹80/किग्रा तक का भाव

जैसीनगर ब्लॉक के कनेरा गांव में अप्रैल-मई 2026 में CIDA और नाबार्ड के सहयोग से महिला किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। इसमें ग्रामीण महिलाओं को सब्जी व फूल उत्पादन की आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ ग्रेडिंग, पैकेजिंग, बाजार की मांग का सटीक आंकलन करने और सही समय पर उत्पाद बाजार तक पहुंचाने की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने इन सीखों को अपने खेतों और मार्केटिंग में लागू किया। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण गेंदे की खेती में देखने को मिला। पहले फूल खिलते ही महिलाएं तुरंत बाजार में बेच देती थीं, लेकिन इस बार उन्होंने हरतालिका तीज और गणेश उत्सव जैसे त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को ध्यान में रखकर तुड़ाई का समय तय किया। आम दिनों में गेंदे के फूलों की थोक कीमत जहाँ ₹20 से ₹35 प्रति किलोग्राम रहती है, वहीं सही समय पर बाजार में उत्पाद लाने से महिलाओं को ₹60 प्रति किलोग्राम तक का थोक भाव मिला। कुछ महिलाओं ने स्वयं फुटकर बिक्री कर ₹80 प्रति किलोग्राम तक का मूल्य हासिल किया।

📈 केवल उत्पादन तकनीक नहीं, बाजार की समझ विकसित करना है मुख्य उद्देश्य: आजीविका मिशन

मध्य प्रदेश आजीविका मिशन के अनूप तिवारी ने बताया, "MEDP कार्यक्रम का मूल उद्देश्य महिलाओं को केवल उत्पादन की तकनीक सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए बाजार और विपणन की सही समझ विकसित करना भी है। प्रशिक्षण में मिली सीख को महिलाओं द्वारा धरातल पर उतारना इस कार्यक्रम की सफलता का एक ठोस उदाहरण है।"

👭 बाजार-उन्मुख उद्यमी बन रही हैं ग्रामीण महिलाएं: अन्य किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

भगवत बाई पटेल, पुष्पा पटेल, राधाबाई कुर्मी, विनिता पटेल, गुलाबरानी पटेल और रचना कुर्मी सहित अन्य महिला किसानों ने इस बाजार अवसर का भरपूर लाभ उठाया है।

यह सफल अनुभव दर्शाता है कि बेहतर कृषि आय केवल अधिक उत्पादन से ही नहीं, बल्कि बाजार की मांग को समझकर सही समय पर सही उत्पाद पहुंचाने से संभव होती है। MEDP प्रशिक्षण की यह सीख महिला किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर एक कुशल 'बाजार-उन्मुख उद्यमी' बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।

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