कैंसर और दिल की बीमारियों की सटीक जांच के लिए उज्जैन में तैयार हो रही स्पेशल दवाइयां, जानिए खासियत
उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी में स्थित अत्याधुनिक प्लांट में कैंसर और हार्ट की सटीक जांच के लिए रेडियोफार्मास्यूटिकल दवाइयों का रात में उत्पादन किया जा रहा है।
उज्जैन: बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन अब केवल एक धार्मिक और आध्यात्मिक शहर ही नहीं, बल्कि देश में हाईटेक मेडिकल टेक्नोलॉजी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र भी बनता जा रहा है। जब पूरा शहर गहरी नींद में सो रहा होता है, तब देवास रोड स्थित विक्रम उद्योगपुरी के लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में बने 'वीआरएम मॉलिक्यूलर एंड न्यूक्लियर मेडिसिन प्राइवेट लिमिटेड' के हाईटेक प्लांट में वैज्ञानिक, इंजीनियर, फार्मासिस्ट और रोबोट एक साथ पूरी तरह सक्रिय होकर रातभर ऐसी स्पेशल रेडियोफार्मास्यूटिकल दवाइयां तैयार करते हैं, जो कैंसर और हृदय (हार्ट) रोगियों की सटीक और समय पर जांच में उपयोग की जाती हैं।
🌐 'सेंट्रल एशिया का सबसे अत्याधुनिक प्लांट' बना उज्जैन में
उज्जैन के देवास रोड स्थित विक्रम उद्योगपुरी में स्थापित यह हाइटेक प्लांट 3 नवंबर 2025 को लोकार्पित हुआ था।
इसके बाद 27 नवंबर 2025 से इसका टेस्ट रन शुरू किया गया और आखिरकार मार्च 2026 से यहां व्यावसायिक उत्पादन (Commercial Production) की शुरुआत हो गई। वर्तमान में यहां तैयार होने वाली इन जीवनरक्षक दवाइयों की आपूर्ति मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित देश के कई अन्य राज्यों में भी की जा रही है। प्लांट के प्रोजेक्ट मैनेजर रियाज खान के अनुसार, "यह सेंट्रल एशिया का सबसे अत्याधुनिक और बेहतरीन प्लांट माना जाता है।"
🌙 रात के वक्त क्यों बनाई जाती हैं कैंसर और हार्ट की दवाइयां?
यहां कैंसर और हार्ट पेशेंट्स के लिए बनने वाली इन दवाइयों की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत यह होती है कि इनकी 'हाफ लाइफ' (Half-Life) बहुत कम होती है।
यानी समय बीतने के साथ-साथ इनकी रेडियोएक्टिव क्षमता लगातार कम होती जाती है। यही कारण है कि इनके उत्पादन से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को मिनटों और घंटों की बेहद सटीक योजना के तहत अंजाम दिया जाता है। इसी वजह से इस प्लांट में रात के समय उत्पादन का कार्य किया जाता है और सुबह 10 बजे से पहले अधिकांश दवाइयां देश के विभिन्न अस्पतालों और पीईटी-सीटी (PET-CT) सेंटरों तक सुरक्षित पहुंचा दी जाती हैं। इस काम के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित डिलीवरी स्टाफ तैनात किया जाता है, जिन्हें वाहन चलाने से लेकर दवाइयों को उठाने, रखने और सुरक्षा किट पहनने के कड़े निर्देश दिए जाते हैं।
💊 आखिर क्या होती हैं ये रेडियोफार्मास्यूटिकल दवाइयां?
यहां तैयार होने वाली दवाइयां सामान्य इलाज की गोलियां नहीं हैं, बल्कि ये पीईटी-सीटी (PET-CT) स्कैन के लिए विशेष रूप से उपयोग होने वाली रेडियोफार्मास्यूटिकल दवाइयां होती हैं।
इन्हें मरीज के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, जिसके बाद ये दवाइयां सीधे कैंसर कोशिकाओं या शरीर के प्रभावित ऊतकों (Tissues) में जाकर जमा हो जाती हैं। पीईटी-सीटी स्कैन के दौरान यही दवाइयां डॉक्टरों को यह बिल्कुल स्पष्ट रूप से बताती हैं कि शरीर के किस हिस्से में कैंसर मौजूद है, वह कितना फैल चुका है और उसका इलाज किस दिशा में किया जाना चाहिए।
🧪 प्लांट में मुख्य रूप से तैयार होने वाली दवाइयां
इस आधुनिक प्लांट में मुख्य रूप से एफडीजी (FDG - Fluorodeoxyglucose), एफ-पीएसएमए (F-PSMA) और एफईएस (FES) जैसी प्रमुख दवाइयां तैयार की जाती हैं।
एफडीजी का उपयोग अधिकांश प्रकार के कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए किया जाता है। एफ-पीएसएमए प्रोस्टेट कैंसर की सटीक जांच में बेहद सहायक है, जबकि एफईएस का उपयोग विशेष रूप से ब्रेस्ट कैंसर के मामलों की जांच के लिए होता है। इसके अलावा प्लांट में गैलियम-68 (Gallium-68) आधारित रेडियोफार्मास्यूटिकल्स पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
🔍 सीटी-एमआरआई से आगे की कड़ी: अंतिम पुष्टि के लिए PET-CT
कई बार सीटी स्कैन और एमआरआई (MRI) कराने के बाद भी डॉक्टरों को केवल बीमारी की आशंका ही बनी रहती है।
ऐसे जटिल मामलों में सटीक निदान के लिए पीईटी-सीटी स्कैन कराया जाता है। स्कैन के दौरान यह रेडियोफार्मास्यूटिकल दवा शरीर के भीतर जाकर कैंसर कोशिकाओं में अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती है, जिससे स्कैनर में बीमारी की वास्तविक और स्पष्ट स्थिति दिखाई देने लगती है। यह सटीक जानकारी डॉक्टरों को मरीज के उपचार की सही योजना तैयार करने में सबसे बड़ी मदद देती है।
⏰ समय से जंग! यहां हर एक मिनट होता है बेहद कीमती
प्लांट में जब दवा तैयार की जाती है, तो यह पहले से ही तय कर लिया जाता है कि किस मरीज का स्कैन किस तय समय पर होना है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी मरीज का पीईटी-सीटी स्कैन सुबह 10 बजे होना है, तो उसके हिसाब से रात करीब 2 बजे ही दवा तैयार कर दी जाती है। दवा की मात्रा भी हमेशा आवश्यकता से अधिक बनाई जाती है, क्योंकि अस्पताल पहुँचते-पहुँचते उसकी रेडियोएक्टिव क्षमता में प्राकृतिक रूप से गिरावट आ जाती है। यदि कोई अस्पताल दोपहर 12 बजे उसी डोज की मांग करे, तो सामान्यतः वह डोज उपलब्ध नहीं कराई जाती, क्योंकि तब तक उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो चुकी होती है और वह पूरी तरह ग्लूकोज में कन्वर्ट हो जाता है। इसलिए मरीज की सुरक्षा को यहाँ सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
🛡️ रेडिएशन के बीच कड़े सुरक्षा मानकों के साथ काम
रेडियोफार्मास्यूटिकल का यह निर्माण सामान्य फार्मा उत्पादन जैसा बिल्कुल नहीं होता, यहाँ 'रेडिएशन सेफ्टी' सबसे ऊपर होती है।
प्लांट में लगभग 50 कर्मचारी दो अलग-अलग शिफ्टों में पूरी मुस्तैदी से काम करते हैं। उत्पादन प्रक्रिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह ऑटोमेटेड और रोबोटिक सिस्टम द्वारा संचालित होता है, ताकि कर्मचारियों का रेडिएशन एक्सपोजर कम से कम हो सके। इसके अलावा विशेष लेड-शील्डेड (मेटल कवर्ड) कमरे, ऑटोमेटेड सिंथेसिस यूनिट, अत्याधुनिक रेडिएशन मॉनिटरिंग सिस्टम और उच्च स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाएं (QC Labs) स्थापित की गई हैं।
❤️ हार्ट अटैक के जोखिम को भी पहले से भांप सकती है यह आधुनिक तकनीक
यह प्लांट केवल कैंसर तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां दिल के मरीजों की जांच के लिए भी विशेष रेडियोफार्मास्यूटिकल तैयार किए जाते हैं।
एनएच3 (अमोनिया) कार्डियक पीईटी टेक्नोलॉजी के माध्यम से हार्ट की मांसपेशियों तक होने वाले रक्त प्रवाह (Blood Flow) का अत्यंत सटीक मूल्यांकन किया जाता है। इससे यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि हृदय की किस नस में ब्लॉकेज बनने की संभावना है, ब्लड सप्लाई कितनी प्रभावित है और आने वाले अगले 3 सालों में मरीज को हार्ट अटैक का जोखिम कितना हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आधुनिक जांच कई मामलों में सामान्य एंजियोग्राफी से भी कहीं अधिक गहरी और महत्वपूर्ण जानकारी देती है, और जरूरी नहीं कि इसे केवल दिल का मरीज ही करवाए, बल्कि कोई भी सामान्य व्यक्ति अपनी सेहत की जांच के लिए इसे करवा सकता है।
🌟 उज्जैन को मिल रही है एक बिल्कुल नई वैश्विक पहचान
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के कारण अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी अलग पहचान रखने वाला उज्जैन अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में भी एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
यहाँ स्थापित हाईटेक न्यूक्लियर मेडिसिन तकनीक, मेडिकल साइक्लोट्रॉन और रेडियोफार्मास्यूटिकल उत्पादन इकाई के जरिए यह शहर कैंसर और हृदय रोगों जैसी गंभीर बीमारियों की सटीक जांच के मामले में देश के चुनिंदा अग्रणी केंद्रों में शामिल हो चुका है। आने वाले वर्षों में यह मेडिकल सुविधा न केवल मध्य प्रदेश और भारत के कई राज्यों के लिए, बल्कि पूरे मध्य एशिया (Central Asia) के मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी वरदान साबित होगी।
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