Indore High Court: 9 करोड़ के इंजेक्शन का मामला, हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- "क्या यह बच्ची लाड़ली बहना नहीं है?"

इंदौर हाईकोर्ट की बच्ची के इलाज के लिए सरकार पर टिप्पणी। स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से पीड़ित बच्ची को 9 करोड़ के इंजेक्शन की जरूरत। कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब।

Jun 19, 2026 - 15:39
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Indore High Court: 9 करोड़ के इंजेक्शन का मामला, हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- "क्या यह बच्ची लाड़ली बहना नहीं है?"

इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने साढ़े 3 साल की बच्ची के गंभीर इलाज को लेकर एक संवेदनशील टिप्पणी की है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) से जूझ रही मासूम की जान बचाने के लिए अमेरिका से आने वाले 9 करोड़ रुपये के इंजेक्शन की आवश्यकता है। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे और पूछा कि क्या यह बच्ची सरकार की 'लाड़ली बहना' नहीं है? कोर्ट के इस रुख ने मासूम के इलाज की उम्मीदों को नया बल दिया है।

💰 7.5 करोड़ जमा, डेढ़ करोड़ की दरकार

पिछले 3 महीनों से बच्ची के परिजन और इंदौर के विभिन्न सामाजिक संगठन फंड इकट्ठा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब तक लोगों के सहयोग से करीब 7.5 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, लेकिन 9 करोड़ की पूरी राशि के लिए अभी भी डेढ़ करोड़ रुपये की कमी है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि परिजन आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बच्ची लंबे समय से लिक्विड डाइट पर है। इंजेक्शन के लिए उसका वजन भी एक निर्धारित सीमा के भीतर रहना अनिवार्य है, जिससे इलाज में देरी जोखिम भरी हो सकती है।

🤝 सोनू सूद भी बढ़ा चुके हैं मदद का हाथ

बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद भी मदद के लिए आगे आए हैं। मामले की गंभीरता को समझते हुए हाई कोर्ट ने न केवल राज्य और केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया है, बल्कि एम्स (AIIMS) को भी इस मामले में जवाब तलब करने के लिए शामिल किया है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि बच्ची के इलाज के लिए उचित और त्वरित कदम उठाए जाएं।

🗓️ अब 7 दिन बाद होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट की पहल के बाद अब प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 दिन का समय निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार की ओर से इलाज में मदद के लिए कोई ठोस योजना या सहायता का प्रस्ताव रखा जा सकता है। इंदौर वासियों और सामाजिक संगठनों की यह मुहिम अब एक निर्णायक मोड़ पर है।

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