रतलाम डोसीगांव मल्टी में ईडब्ल्यूएस आवास खाली कराने पर हंगामा, कांग्रेस नेता पारस सकलेचा की तबीयत बिगड़ी

रतलाम के डोसीगांव मल्टी में ईडब्ल्यूएस आवास खाली कराने की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हुआ। बकाया राशि न देने वाले लोगों को हटाने पहुँची टीम का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता की तबीयत बिगड़ गई।

Aug 06, 2026 - 18:26
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रतलाम डोसीगांव मल्टी में ईडब्ल्यूएस आवास खाली कराने पर हंगामा, कांग्रेस नेता पारस सकलेचा की तबीयत बिगड़ी

रतलाम : मध्य प्रदेश के रतलाम शहर के डोसीगांव मल्टी में ईडब्ल्यूएस (EWS) आवास खाली कराने की कार्रवाई के दौरान उस समय जमकर हंगामा खड़ा हो गया, जब सुबह-सुबह नगर निगम की टीम भारी-भरकम पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गई। इस कार्रवाई की भनक लगते ही रहवासियों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। कार्रवाई से ठीक पहले यहाँ के स्थानीय रहवासी विरोध दर्ज कराने के लिए कलेक्ट्रेट भी पहुँचे थे और प्रदर्शन किया था। इन रहवासियों के समर्थन में कांग्रेस नेता पारस सकलेचा भी बेदखली की इस कार्रवाई का विरोध करने के लिए मौके पर जा पहुँचे। विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल के साथ उनकी जमकर झूमाझटकी हुई। इसी गहमागहमी और तनाव के बीच अचानक कांग्रेस नेता पारस सकलेचा की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए रतलाम जिला अस्पताल भिजवाया गया।

🏢 ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स के 170 से अधिक लोगों पर बकाया है राशि

विस्तृत जानकारी के अनुसार, आज से करीब सात साल पहले लगभग 400 झुग्गी-झोपड़ी वाले गरीब परिवारों को नगर निगम द्वारा बनाई गई ईडब्ल्यूएस आवास योजना की इन बिल्डिंगों में बसाया गया था।

इनमें से कुल 208 परिवारों ने शुरुआत में केवल 20 हजार रुपए की मार्जिन मनी ही जमा करवाई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि तब से लेकर अब तक महज 30 परिवारों ने ही अपनी पूरी 2 लाख रुपए की राशि जमा कराई है। वर्तमान में 170 से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिन पर लगभग 1 लाख 80 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि बकाया चल रही है।

इस संबंध में नगर निगम कमिश्नर अनिल भाना ने जानकारी देते हुए बताया कि, "इन सभी बकायादार परिवारों को पिछले लंबे समय से लगातार कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद इनके द्वारा एक बार भी बकाया राशि जमा नहीं करवाई गई।"

🪨 कार्रवाई से 5 दिन पहले निगम टीम पर हुआ था पथराव

बताया जा रहा है कि इन आवासों को खाली कराने के लिए जब से 5 दिन पूर्व नगर निगम की टीम नोटिस देने पहुँची थी, तब यहाँ के लोगों ने उग्र होकर निगम टीम पर पथराव भी कर दिया था।

प्रशासन का मुख्य आरोप यह है कि यहाँ के अधिकांश लोगों ने अपने अलॉटेड फ्लैट्स खुद न रहकर दूसरों को किराए पर दे रखे हैं, जिन्हें अब नगर निगम सख्ती से खाली कराने का काम कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों को यहाँ से हटाया जा रहा है, उनके रहने के लिए नगर निगम ने रैनबसेरों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर वैकल्पिक व्यवस्था की है।

हंगामे की सूचना मिलते ही नगर निगम कमिश्नर सहित जिले के तमाम आला अधिकारी भारी पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुँचे और पूरी सख्ती के साथ बेदखली की इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।

💸 नगर निगम को हो रहा था हर माह लाखों का वित्तीय नुकसान

नगर निगम अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इन फ्लैट्स के विवाद और बकाया के चलते निगम को हर महीने लाखों रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि यहाँ रहने वाले लोग लंबे समय से बिजली के बिल तक का भुगतान नहीं कर रहे हैं।

दूसरी ओर, फ्लैट खाली करने से साफ इनकार कर रहे स्थानीय रहवासियों का दर्द यह है कि, "इस कड़ाके की बारिश के मौसम में वे लोग अपनी गृहस्थी का सारा सामान और छोटे-छोटे बच्चों को लेकर आखिर कहाँ जाएँगे? रैनबसेरे जैसी जगहों पर वे अपने पूरे परिवार के साथ कैसे रह सकते हैं और कब तक वहाँ टिक पाएंगे? हम लोग बेहद गरीब तबके से हैं, इसलिए हमारी कोई भी सुनवाई नहीं कर रहा है।"

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