Narmada Parikrama: अमरकंटक से नरसिंहपुर तक हाथों के बल नर्मदा परिक्रमा, संत धर्मपुरी जी महाराज की तपस्या देख लोग हैरान
नर्मदा परिक्रमा का अद्भुत उदाहरण! संत धर्मपुरी जी महाराज अमरकंटक से हाथों के बल चलकर कर रहे हैं 3500 किमी की यात्रा। गोटेगांव में भव्य स्वागत।
नरसिंहपुर। आपने नर्मदा परिक्रमा करते हुए कई श्रद्धालुओं को देखा होगा, जो पैदल यात्रा करते हैं। लेकिन, शायद ही आपने कभी सुना या देखा होगा कि कोई श्रद्धालु पैरों से नहीं, बल्कि हाथों के बल चलकर नर्मदा परिक्रमा पर निकला हो। सिद्ध संत धर्मपुरी जी महाराज का यही संकल्प अब लोगों के लिए आस्था का अद्भुत उदाहरण बन गया है। जब महाराज श्री अमरकंटक से हाथों के बल परिक्रमा करते हुए नरसिंहपुर के गोटेगांव पहुंचे, तो उनके दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
🚶♂️ 4 साल का कठिन संकल्प
धर्मपुरी जी महाराज ने दशहरा के पावन पर्व पर अमरकंटक से मां नर्मदा की 3500 किलोमीटर लंबी असाधारण परिक्रमा शुरू की थी। महाराज श्री प्रतिदिन हाथों के बल चलकर लगभग ढाई से तीन किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। इस कठिन तपस्या को पूर्ण करने में उन्हें लगभग 4 साल का समय लगने की उम्मीद है। उनके इस दृढ़ संकल्प को देखकर हर कोई उनकी भक्ति और समर्पण को नमन कर रहा है।
📍 290 किमी की यात्रा पूर्ण, मानव कल्याण है उद्देश्य
महाराज श्री अब तक अमरकंटक से गोटेगांव तक लगभग 290 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुके हैं। गोटेगांव के भगतराम चौराहे के पास स्थित राम मंदिर में विश्राम के बाद वे पुनः अपनी यात्रा पर निकल पड़े। महाराज श्री के साथ उनके शिष्य भी लगातार इस परिक्रमा में सहयोग दे रहे हैं। महाराज श्री के गुरु भाई सुमन गिरी जी महाराज ने बताया कि, "इस परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण, विश्व शांति और देश में खुशहाली लाना है।"
🕉️ सादगी और भक्ति की मिसाल
अपनी इस लंबी तपस्या के दौरान महाराज श्री केवल एक समय का भोजन ग्रहण कर रहे हैं। साथ ही, प्रत्येक एकादशी के दिन जिस भी स्थान पर वे रुकते हैं, वहां उनके द्वारा भंडारे का आयोजन किया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कई संतों के दर्शन किए हैं, लेकिन ऐसी कठिन और अद्वितीय परिक्रमा पहली बार देखी है। महाराज श्री की यह यात्रा अब धर्म और आस्था का एक अनूठा उदाहरण बन गई है।
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