UNHRC में भारत का प्रहार: पाकिस्तान को बताया 'फ्रेंकस्टीन स्टेट', आतंकवाद पर UN में दी कड़ी नसीहत
UNHRC में भारत ने पाकिस्तान को 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' करार दिया। कश्मीर मुद्दे पर भारत का स्पष्ट रुख, कहा- PoJK में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है इस्लामाबाद।
जिनेवा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र के दौरान भारत ने पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया है। भारतीय मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए उसे 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' (भस्मासुर की तरह) करार दिया। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद आज खुद के ही तैयार किए गए आतंकवाद के जाल में फंस चुका है और अपनी विफलताओं के लिए भारत पर आरोप लगाकर वैश्विक सहानुभूति बटोरने का पाखंड कर रहा है।
👹 खुद के पाले राक्षस का शिकार है पाकिस्तान
अनुपमा सिंह ने कहा कि यह एक विडंबना है कि जिस देश के रक्षा मंत्री स्वयं आतंकवादियों को पनाह देने और प्रशिक्षण देने की बात स्वीकार कर चुके हैं, वही देश आज खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता है। 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' का संदर्भ देते हुए उन्होंने समझाया कि पाकिस्तान ने अपने निजी स्वार्थ के लिए जिन हिंसक तत्वों को पाला था, वे अब उसी के विनाश का कारण बन रहे हैं, जैसे भारतीय पौराणिक कथाओं में 'भस्मासुर' अपने ही निर्माता को भस्म करने पर आमादा हो गया था।
🛑 PoJK में दमन और सिंधु जल संधि पर दो-टूक
भारतीय राजनयिक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हो रहे मानवाधिकारों के दमन का मुद्दा उठाया। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर की गई हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब नागरिक रोटी, बिजली और सम्मान की मांग करते हैं, तो पाकिस्तान की हुकूमत उन्हें गोलियों से दबाती है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पार से जारी आतंकवाद के चलते अब 66 वर्ष पुरानी 'सिंधु जल संधि' वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं रह गई है।
🇮🇳 जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग
अनुपमा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष नई दिल्ली का रुख पुनः स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान की ओर से कश्मीर पर की जा रही बयानबाजी को 'मौसमी नौटंकी' करार देते हुए भारतीय राजनयिक ने नसीहत दी कि इस्लामाबाद को भारतीय क्षेत्रों पर नजर गड़ाने के बजाय अपने टूटते और बिखरते आंतरिक हालातों को संभालने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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