राजगढ़ में दर्दनाक हादसा, 100 फीट तक कंटेनर के नीचे घिसटे पिता-मासूम बेटा
राजगढ़ के खिलचीपुर में तेज रफ्तार कंटेनर की टक्कर से बाइक सवार परिवार हादसे का शिकार हो गया। 100 फीट तक घिसटने से 4 साल के मासूम की दर्दनाक मौत हो गई।
राजगढ़ : मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक चार साल का मासूम बच्चा अपने पिता के साथ लगभग 100 फीट तक एक तेज रफ्तार ट्रक के कंटेनर के पहियों के नीचे घिसटता चला गया, जबकि उसकी माँ टक्कर लगते ही सड़क पर दूर जा फिंकी। यह अनियंत्रित ट्रक राजस्थान की ओर से आ रहा था, जिसने बाइक पर सवार एक पूरे दंपत्ति और उनके छोटे से बच्चे को अपनी चपेट में ले लिया।
इस भीषण दुर्घटना में माँ राजन बाई टक्कर लगने के कारण दूर जा गिरी, जिससे उनके शरीर में कई गंभीर चोटें आईं। वहीं, पिता अनार भिलाला और उनका चार साल का बेटा रविराज करीब 100 फीट तक कंटेनर के नीचे बुरी तरह फँसे रहे। घटना को अंजाम देने के बाद डर के मारे चालक मौके पर ही कंटेनर छोड़कर फरार हो गया।
🛣️ एनएच-52 पर हुआ हादसा, मंदिर दर्शन कर लौट रहा था परिवार
यह रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा राजगढ़ जिले के खिलचीपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एनएच-52 (राष्ट्रीय राजमार्ग) पर हुआ। खिलचीपुर थाना पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, छापीखेड़ा गाँव के रहने वाले अनार भिलाला अपनी पत्नी राजन बाई और अपने इकलौते चार वर्षीय बेटे रविराज को साथ लेकर बड़े महाराज मंदिर में दर्शन करने गए थे और वहाँ से लौट रहे थे।
वे सभी अपनी ससुराल की ओर जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी बाइक इस बेकाबू कंटेनर की चपेट में आ गई। इस दुर्घटना में पत्नी राजन के सिर में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि पिता अनार भिलाला के दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया है। वहीं, हादसे का शिकार हुआ चार साल का मासूम रविराज गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
💨 साँस नली में कीचड़ और गोबर भरने से बिगड़ी मासूम की हालत
कंटेनर की भयानक टक्कर के बाद उसके नीचे फँसे चार साल के मासूम रविराज की साँस नली (Windpipe) में सड़क पर पड़ा गोबर और कीचड़ पूरी तरह भर गया था। दुर्घटना के काफी देर बाद मौके पर पहुँची डायल-112 की टीम ने घायलों को तुरंत खिलचीपुर के सिविल अस्पताल पहुँचाया।
अस्पताल पहुँचने पर चार साल के बच्चे रविराज की हालत बेहद नाजुक और गंभीर थी। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने सबसे पहले उसकी साँस की नली को साफ करने का अथक प्रयास किया। उसकी जान बचाने के लिए करीब 15 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) भी दिया गया, लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकेगी और उसने दम तोड़ दिया।
🚑 समय पर एम्बुलेंस मिलती तो शायद बच जाती मासूम की जान
इस पूरे हृदयविदारक मामले में प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही भी सामने आई है। खिलचीपुर सिविल अस्पताल के डॉक्टर कमल दांगी ने इस संबंध में बताया, "बच्चे की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत किसी हायर हेल्थ सेंटर (बड़े अस्पताल) रैफर करना जरूरी था। हम अस्पताल की स्थिति अच्छी तरह समझ रहे थे, इसलिए हमारे स्टाफ द्वारा तीन बार फोन करके एम्बुलेंस बुझाने का प्रयास किया गया। लेकिन इसके बावजूद एम्बुलेंस करीब 45 मिनट की भारी देरी से पहुँची। यदि समय रहते बच्चा हायर सेंटर पहुँच जाता, तो उसकी जान बचने की पूरी संभावना थी। हालांकि, अस्पताल के भीतर भी एम्बुलेंस आने का इंतजार करते समय डॉक्टर और स्टाफ ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की थी।"
🛑 अनियंत्रित होकर झाड़ियों में जा रुका कंटेनर, टला और बड़ा हादसा
मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह गनीमत रही कि दुर्घटना के बाद अनियंत्रित कंटेनर सड़क से उतरकर पास की झाड़ियों और गड्ढे में जाकर रुक गया, अन्यथा इस भीषण हादसे की चपेट में आने से कई अन्य बेकसूर लोगों की भी जान जा सकती थी।
हादसे का शिकार हुआ यह पूरा परिवार धुआखेड़ा गाँव का रहने वाला है। घायल हुए पिता अनार पेशे से एक साधारण किसान हैं, जो अपनी बाइक पर पत्नी और बच्चे को बिठाकर अपनी ससुराल जा रहे थे। इस अकाल और दर्दनाक मौत से पूरे परिवार में मातम छा गया है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
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