नेतन्याहू ने ठुकराया ट्रंप का गाजा समझौता, कहा- जब तक हमास नहीं छोड़ेगा हथियार, वापसी नहीं

इजराइल ने ट्रंप के गाजा समझौते को ठुकरा दिया है। दूसरी ओर, यमन में हूती हमलों और ईरान-ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट समझौते को लेकर हलचल तेज हो गई है।

Aug 10, 2026 - 13:17
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नेतन्याहू ने ठुकराया ट्रंप का गाजा समझौता, कहा- जब तक हमास नहीं छोड़ेगा हथियार, वापसी नहीं

इजराइल ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा समझौते को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है। इसी बीच, होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) के प्रबंधन को लेकर ईरान और ओमान के बीच एक संभावित समझौते की जानकारी सामने आई है, क्योंकि तेहरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दुश्मन देशों से जुड़े जहाजों को इस बेहद अहम जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने देश के लाल सागर तट पर सरकार के कब्जे वाले एक प्रमुख बंदरगाह पर हमला कर दिया, जिससे रणनीतिक शिपिंग मार्गों के लिए खतरे और गृहयुद्ध के दोबारा लौटने की आशंका काफी बढ़ गई है। इसके अलावा, हूतियों ने पड़ोसी देश सऊदी अरब में स्थित एक तेल सुविधा केंद्र को भी ड्रोन हमलों का निशाना बनाया।

🛑 हमास के हथियार छोड़ने तक इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी: बेंजामिन नेतन्याहू

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा गाजा के लिए घोषित किए गए समझौते को पूरी तरह खारिज करते हुए दो टूक कहा है कि इजराइली सेना तब तक गाजा से कोई वापसी नहीं करेगी, जब तक हमास संगठन वास्तव में अपने हथियार पूरी तरह नहीं छोड़ देता।

नेतन्याहू ने कैबिनेट की एक बैठक में स्पष्ट किया कि इजराइल इस 15-सूत्रीय दस्तावेज को नहीं मानता, हालांकि वाशिंगटन के साथ गाजा की आगामी योजनाओं पर कूटनीतिक चर्चाएँ जारी रखी जाएंगी। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना था कि हमास आतंकवादी समूह के हथियार सौंपने की प्रक्रिया पूरी होते ही इजराइली सेना पीछे हट जाएगी। हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका समूह इस रोडमैप के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्हें उम्मीद है कि मध्यस्थ देश तथा अमेरिका प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर दबाव बनाएंगे।

💥 यमन के मोखा बंदरगाह पर हूती हमला, कई लोगों की मौत

यमन सरकार की सहयोगी मानी जाने वाली ‘नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज’ ने जानकारी दी है कि मोखा बंदरगाह पर हुए भीषण हूती हमले में कम से कम सात लोग (जिनमें चार सैनिक और तीन आम नागरिक शामिल हैं) मारे गए हैं, जबकि 15 अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सूचना मंत्रालय के असिस्टेंट अंडरसेक्रेटरी फ़ायेद अल-नोमान ने बताया कि विद्रोहियों ने अंधाधुंध मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे बंदरगाह की इमारतों, पियर्स (घाटों) के साथ-साथ व्यावसायिक सामान और खाद्य सामग्री को भी भारी क्षति पहुँची है।

मोखा वर्तमान में यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में एक मुख्य बंदरगाह है, जिसे ऐसे जहाजों को संभालने के लिए विशेष रूप से रेनोवेट किया गया था जो हूतियों के कब्जे वाले होदेइदाह बंदरगाह से नहीं गुजर सकते। हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने सैन्य बलों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया है।

🔥 सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी में ड्रोन हमले से लगी आग

हूती सेना के प्रवक्ता याह्या सरी ने मीडिया को बताया कि उन्होंने सऊदी ड्रोन द्वारा यमन के हज्जा और सादा प्रांतों के हवाई क्षेत्र (Airspace) के उल्लंघन का करारा जवाब देते हुए सऊदी अरब के जाजान शहर में स्थित ‘अरामको रिफाइनरी’ को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रिफाइनरी की एक फैसिलिटी में आग लग गई थी, हालांकि गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। हालांकि, मंत्रालय ने आग लगने के स्पष्ट कारणों की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इन लगातार हमलों से साल 2022 में हुए संघर्षविराम समझौते के बाद एक बार फिर यमन में गृहयुद्ध के भयानक रूप से भड़कने का खतरा पैदा हो गया है।

🌐 ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर संभावित समझौता

होर्मुज स्ट्रेट के दोनों सिरों पर स्थित ईरान और ओमान इस संवेदनशील जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए एक अस्थायी समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इस संभावित समझौते के तहत जहाज ईरान की सीमा के पास से प्रवेश करेंगे और ओमान की सीमा के पास से बाहर निकलेंगे। बातचीत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस अंतरिम अवधि के दौरान सभी कमर्शियल जहाजों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या टोल टैक्स का भुगतान किए आवाजाही करने की छूट मिलेगी।

इस पूरी कसरत का मुख्य मकसद अमेरिका और ईरान के बीच हुए अलग अंतरिम समझौते को फिर से पटरी पर लाना है। वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को युद्ध शुरू होने से पहले एक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था। सूत्रों ने बताया कि इस समझौते को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों का समर्थन भी प्राप्त है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में ईरान, ओमान, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा संयुक्त रूप से इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

⚓ दुश्मन देशों के जहाजों की आवाजाही पर रहेगी पूर्ण पाबंदी

ईरान ने रविवार को होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन को लेकर चल रही योजना में सकारात्मक प्रगति के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन देश की संसद के एक वरिष्ठ सदस्य ने स्पष्ट किया कि युद्ध और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में शामिल दुश्मन देशों के जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी।

सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने इस सामान्य रूपरेखा को अपनी मंजूरी दे दी है। संसद के पीठासीन बोर्ड के एक सदस्य ने बयान दिया कि जिन देशों ने ईरान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुँचाया है, वे तब तक इस जलमार्ग से अपने जहाजों को नहीं निकाल सकते, जब तक कि वे इसके लिए उचित भरपाई न कर दें। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों 'फार्स' और 'तस्नीम' के अनुसार, इस सूची में संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल को मुख्य रूप से दुश्मन देशों के रूप में शामिल किया गया है। ईरान की शक्तिशाली ‘सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद’ ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका अपना आक्रामक व्यवहार नहीं सुधारता, तब तक होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह नहीं खोला जाएगा।

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