मंदसौर में सावन पर अनोखी शुरुआत, भस्म और दीपों की रोशनी में हुई भगवान शिव की शयन आरती
मंदसौर के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में महाकाल की तर्ज पर दीप ज्योति आरती की नई परंपरा शुरू हुई है। सावन के विशेष अवसरों पर दीपक की रोशनी में यह आरती की जा रही है।
सावन के पवित्र और पावन महीने में मध्य प्रदेश के मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के माहौल को और अधिक दिव्य बनाने के लिए इस वर्ष से एक नई परंपरा की शुरुआत की गई है। यहाँ उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर अब विशेष 'दीप ज्योति आरती' शुरू की गई है। मंदिर प्रबंध समिति की आधिकारिक मंजूरी के बाद पुजारियों द्वारा रात्रि कालीन शयन आरती के स्थान पर इस भव्य दीप ज्योति आरती का श्रीगणेश किया गया है। भोलेनाथ की इस अनूठी आरती के तहत रविवार की रात ठीक 11 बजे मंदिर के गर्भगृह की सभी लाइटें बंद कर पूरी तरह अंधेरा किया गया और केवल दीपकों की टिमटिमाती रोशनी के बीच भगवान की प्रतिमा की पूरे 1 घंटे तक भव्य आरती संपन्न हुई। इस नई परंपरा के आरंभ होने से देश-विदेश से आने वाले शिव भक्तों में अभूतपूर्व उत्साह और खुशी का माहौल देखा जा रहा है।
✨ महाकाल की तर्ज पर पशुपतिनाथ मंदिर में सजी दीपों की महफिल
मंदसौर के इस ऐतिहासिक पशुपतिनाथ मंदिर में रात के समय आयोजित होने वाली सामान्य शयन आरती को ही अब 'दीप ज्योति आरती' का एक नया और भव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। मंदिर प्रबंध समिति की सहमति के बाद यह विशेष आरती केवल पवित्र सावन मास के दौरान प्रत्येक रविवार और सोमवार की रात्रि को ही संपन्न होगी। इस विशेष अनुष्ठान की शुरुआत भगवान की अष्टमुखी और लगभग साढ़े 7 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा को पारंपरिक तरीके से भस्म अर्पित करने के साथ होती है। इसके पश्चात, गर्भगृह की कृत्रिम और आधुनिक रोशनी को पूरी तरह से बुझा दिया जाता है और केवल आरती के दीपकों के प्रकाश में ही यह दिव्य आरती की जाती है।
🕯️ गर्भगृह में अंधेरे के बीच एक घंटे तक गूंजे भोलेनाथ के जयकारे
इस नई और आध्यात्मिक परंपरा के पहले ही दिन इस अद्भुत नजारे के साक्षात दर्शन के लिए मंदिर परिसर में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। पारंपरिक ढोल और नगाड़ों की गूंज के साथ लगभग 1 घंटे तक अनवरत भगवान भोलेनाथ की यह मनमोहक आरती चलती रही। इस दौरान उपस्थित शिवभक्त भक्तिभाव से सराबोर होकर आनंद में झूमते हुए नजर आए।
मंदिर के प्रधान पुजारी राकेश भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया, "सावन का यह पवित्र महीना चल रहा है और देवाधिदेव महादेव की आराधना का यह सबसे उत्तम दौर है। इसी पावन श्रृंखला में मंदिर प्रबंध समिति की स्वीकृति के बाद भगवान भोलेनाथ को सावन माह के रविवार और सोमवार की रात्रि में शयन आरती को दीप ज्योति आरती का रूप देकर इस सुंदर परंपरा का सूत्रपात किया गया है।"
🙌 भक्तों का उमड़ा सैलाब, दर्शनार्थियों ने साझा किए अपने अनुभव
पशुपतिनाथ मंदिर में शुरू हुई इस नई परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए शहर भर के श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। इस आरती में सम्मिलित होने आए एक प्रमुख दर्शनार्थी रवि अग्रवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया, "यह परंपरा बेहद अनूठी और मन को शांति देने वाली है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहाँ एकत्रित हुए हैं।" उन्होंने आगे कहा कि महाकाल की तर्ज पर शुरू हुई इस परंपरा के पशुपतिनाथ मंदिर में लागू होने से स्थानीय भक्तों और पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
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