उज्जैन: महाकाल मंदिर में सेलिब्रिटी की आवभगत पर विवाद, सनातन धर्म मोर्चा ने CM को लिखा पत्र
उज्जैन महाकाल मंदिर में सेलिब्रिटी और VIP भक्तों की आवभगत पर सनातन धर्म मोर्चा ने आपत्ति जताई है। CM मोहन यादव को पत्र लिख मुफ्त प्रसाद और शॉल वितरण बंद करने की मांग की।
उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में सेलिब्रिटी की आवभगत पर सनातन धर्म मोर्चा ने आपत्ति जताई है। मोर्चा अध्यक्ष ने मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि प्रतिदिन भस्म आरती में वीआईपी (VIP) व हीरो-हीरोइन के नाम पर हर किसी को प्रथम पंक्ति में बैठाया जा रहा है। अधिकारी और कर्मचारी इन्हें मुफ्त में लड्डू प्रसाद और शॉल भेंट कर सम्मानित भी कर रहे हैं, यह व्यवस्था तुरंत बंद होनी चाहिए।
अखिल भारतीय मंदिर मठ सनातन धर्म मोर्चा के अध्यक्ष किशोर कुशवाह ने बताया कि महाकाल मंदिर में वीआईपी दर्शन व्यवस्था आम भक्तों के हितों पर कुठाराघात है। सालों से रसूखदार लोग वीआईपी के नाम पर नंदी मंडपम में अव्यवस्था फैला रहे थे, अब सेलिब्रिटी के नाम पर नई धांधली शुरू हो गई है।
पिछले कुछ दिनों से भस्म आरती में हीरो, हीरोइन व उनके रिश्तेदारों के नाम पर नई प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था शुरू हो गई है। मंदिर कर्मचारी पूरे समय इनकी आवभगत में लगे रहते हैं। आरती समाप्त होने के बाद इनका सत्कार किया जाता है। कर्मचारी इन्हें फ्री में लड्डू प्रसाद व शॉल भेंट करते हैं। सेलिब्रिटी के नाम पर सालभर में लाखों रुपये का लड्डू प्रसाद मुफ्त बांटा जा रहा है।
आगे बैठने वालों से पूछताछ करें प्रशासक, सामने आएगा नया बैठक घोटाला
महाकाल मंदिर में जितना घोटाला भस्म आरती दर्शन अनुमति के नाम पर हो रहा है, उससे कहीं अधिक भक्तों को आगे बैठाने के नाम पर हो रहा है। मंदिर प्रशासक ने बीते दिनों अपने औचक निरीक्षण में भस्म आरती अनुमति दिलाने के नाम पर रुपये वसूलने वाले दलालों का पर्दाफाश किया था। यदि प्रशासक किसी दिन आगे बैठने वाले तथा सेलिब्रिटी के नाम पर लाए गए लोगों से पूछताछ करें, तो एक नया बैठक घोटाला सामने आ सकता है।
सोशल मीडिया पर भी उठ रहा है विरोध, इंटरनेट माध्यमों पर जताई आपत्ति
महाकाल मंदिर में वीआईपी कल्चर तथा सेलिब्रिटी के नाम पर आम भक्तों के साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध इंटरनेट माध्यमों और सोशल मीडिया पर भी विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। श्रद्धालु इस मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखते हुए मंदिर प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन जनभावना को दरकिनार कर रहा है।
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