सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट: क्या अगले हफ्ते संभलेगा बाजार? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
पिछले सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अगले हफ्ते आने वाले वैश्विक आर्थिक आंकड़ों का बुलियन बाजार पर क्या असर होगा?
नई दिल्ली। पिछले सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली के दबाव के चलते दोनों कीमती धातुएं काफी कमजोर रहीं। अब बाजार की नजरें अगले सप्ताह आने वाले कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों पर टिकी हैं, जो सोने-चांदी की कीमतों की अगली दिशा तय करेंगे।
विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर सोने की चमक पर पड़ सकता है। आमतौर पर वैश्विक तनाव बढ़ने पर निवेशक 'सेफ हेवन' (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने का रुख करते हैं, लेकिन हाल के दिनों में तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों का ध्यान दूसरी ओर खींचा है।
अमेरिका, चीन और भारत के आर्थिक आंकड़े तय करेंगे सोने-चांदी का भविष्य
अगले सप्ताह चीन और अमेरिका के व्यापार तथा महंगाई से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने वाले हैं। इसके अलावा अमेरिका के 'कंज्यूमर सेंटीमेंट' के आंकड़े और भारत की खुदरा महंगाई दर (CPI) पर भी बाजार की पैनी नजर रहेगी। इन आंकड़ों से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर संकेत मिलेंगे, जिसका सीधा असर बुलियन बाजार पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले भी निवेशकों के लिए निर्णायक रहेंगे। यदि ब्याज दरों को लेकर कोई बड़ा संकेत मिलता है, तो इसका असर डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड और अंततः सोने-चांदी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
पिछले हफ्ते कितनी गिरी कीमतें? आंकड़ों में समझें गिरावट का गणित
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले सप्ताह 5,317 रुपये यानी 3.3 फीसदी टूटकर 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 18,461 रुपये यानी करीब 7 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 2,48,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मंदी का रुख रहा; कॉमेक्स (Comex) पर सोना करीब 5 फीसदी और चांदी लगभग 9 फीसदी तक फिसल गई।
अगले हफ्ते क्या रह सकता है बाजार का रुख?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोने और चांदी में सुधार की बजाय 'करेक्शन' का दौर नजर आ रहा है। मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरों की आशंका और मजबूत रुपये के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,400-4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बना रहता है, तो कीमतों में तेजी सीमित रहने की संभावना है। ऐसे में अगले सप्ताह निवेशकों को आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखनी चाहिए।
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