उफनते नदी-नालों को पार कर स्कूल न जाएं शिक्षक, लोक शिक्षण संचालनालय ने जारी किए निर्देश

मध्य प्रदेश के सरकारी शिक्षकों को बारिश के चलते ई-अटेंडेंस में राहत दी गई है। अब शिक्षक सुबह 10:30 बजे तक उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।

Aug 12, 2026 - 15:12
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उफनते नदी-नालों को पार कर स्कूल न जाएं शिक्षक, लोक शिक्षण संचालनालय ने जारी किए निर्देश

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने भारी बारिश और खराब मौसम को देखते हुए सरकारी शिक्षकों को ई-अटेंडेंस (E-Attendance) के नियमों में बड़ी छूट प्रदान की है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा विभिन्न शिक्षक संगठनों के साथ हुई लंबी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि अब शिक्षकों पर सुबह 9:45 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज कराने की कोई अनिवार्यता या बाध्यता नहीं रहेगी। इसके स्थान पर अब शिक्षक सुबह 10:30 बजे तक अपनी डिजिटल उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे।

🤝 शिक्षक संघ की पहल और आयुक्त के साथ हुई बैठक में बदला गया समय

लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के साथ मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों की हुई एक उच्चस्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक में यह सकारात्मक निर्णय लिया गया। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. छत्रवीर सिंह राठौर ने मजबूती से यह मांग उठाई थी कि जब स्कूलों के संचालन का निर्धारित समय ही सुबह 10:30 बजे से दोपहर 4:30 बजे तक का है, तो ऐसे में शिक्षकों पर सुबह 9:45 बजे ई-अटेंडेंस लगाने का अनुचित दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। आयुक्त महोदय ने शिक्षकों की इस तार्किक मांग को सहर्ष स्वीकार करते हुए 10:30 बजे तक उपस्थिति दर्ज करने की आधिकारिक छूट प्रदान कर दी है। इसके अलावा, अत्यधिक खराब मौसम या अन्य विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुबह 10:45 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने की सुविधा दिए जाने पर भी सहमति बन गई है।

🏠 डिजिटल नियम थोपने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं देने की उठी मांग

ई-अटेंडेंस के लगातार बदलते और कड़े नियमों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने तल्ख तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग को दूरदराज के ग्रामीण अंचलों में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर केवल डिजिटल और तकनीकी नियम थोपने के बजाय सबसे पहले उनकी बुनियादी और मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों के लिए ठहरने हेतु आवास, सुरक्षित आवागमन के साधन और विशेष ग्रामीण भत्ते जैसी व्यवस्थाएं प्राथमिकता से सुनिश्चित की जानी चाहिए, क्योंकि शिक्षक तमाम विपरीत परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करते हुए भी ग्रामीण स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूती से थामे हुए हैं।

⚠️ सुरक्षा सर्वोपरि: उफनते नदी-नालों को पार न करने के सख्त निर्देश

प्रदेश भर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बाढ़ जैसे गंभीर हालातों को मद्देनजर रखते हुए लोक शिक्षण आयुक्त ने सुरक्षा संबंधी बेहद सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि बारिश या बाढ़ के दौरान कोई भी शिक्षक या छात्र किसी भी परिस्थिति में अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते हुए नदी-नालों को पार करके स्कूल न जाए। यदि किसी क्षेत्र में इस तरह की खतरनाक स्थिति निर्मित होती है, तो संबंधित शिक्षक तुरंत अपने संकुल प्राचार्य या विद्यालय के प्रिंसिपल को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से इसकी सूचना दें। स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विभागीय स्तर पर इस प्रकार की सूचना को पूरी तरह वैध मानकर उपस्थिति में आवश्यक रियायत और छूट प्रदान की जाएगी।

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