धान की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं ये तरीका: नर्सरी तैयार करने से पहले रखें इन 5 बातों का ध्यान
धान की नर्सरी कैसे तैयार करें? वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति से जानें गहरी जुताई, बीज उपचार और सॉइल सोलराइजेशन के महत्वपूर्ण टिप्स ताकि मिले बंपर पैदावार।
शहडोल। खरीफ सीजन में धान की खेती की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। जून में मॉनसून की शुरुआत के साथ ही किसान धान की नर्सरी (पौधशाला) तैयार करने में जुट गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि आप नर्सरी तैयार करते समय कुछ तकनीकी बातों का ध्यान रखें, तो न केवल पौध स्वस्थ होगी, बल्कि धान की पैदावार भी बंपर होगी।
नर्सरी के लिए स्थान का चयन और मिट्टी का सौर्यीकरण
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं कि धान की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे पहले स्थान का चयन सावधानीपूर्वक करें। ऐसी जगह चुनें जहाँ पर्याप्त धूप और पानी की उपलब्धता हो। स्थान तय करने के बाद गर्मी के मौसम में उस खेत की गहरी जुताई कर दें। मिट्टी में तेज धूप लगने से हानिकारक कीट, बीमारियों के कारक और खरपतवार प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाते हैं। इसे 'सॉइल सोलराइजेशन' कहा जाता है। जहाँ साल-दर-साल नर्सरी डाली जाती है, वहाँ यह प्रक्रिया बेहद जरूरी है ताकि बिना केमिकल के मिट्टी शुद्ध हो सके।
खाद का प्रबंधन और बीज का उपचार
जुताई के बाद मिट्टी को तैयार करने के लिए गोबर की खाद या अच्छी तरह से सड़ी हुई कंपोस्ट खाद का उपयोग करें। यदि वर्मी कंपोस्ट उपलब्ध हो, तो उसे बीज के साथ मिलाकर डालना अत्यंत लाभकारी होता है। रासायनिक खाद की आवश्यकता होने पर मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की हल्की मात्रा आखिरी जुताई के समय मिलाई जा सकती है।
बीज को मिट्टी में डालने से पहले उसे 'ट्राइकोडर्मा विरडी' (Trichoderma viride) जैसे जैविक कवकनाशी से उपचारित जरूर करें। इससे बीज जनित रोगों से सुरक्षा मिलती है।
बीज बुवाई और नमी का प्रबंधन
बीज डालने के बाद हल्की जुताई करें या पाटा चलाएं ताकि बीज मिट्टी की पतली परत से ढक जाएं। इससे पक्षियों द्वारा बीज चुगने का खतरा कम हो जाता है। बुवाई के तुरंत बाद हल्का पानी दें ताकि मिट्टी में उचित नमी बनी रहे। अंकुरण के लिए यह नमी अनिवार्य है। पूरे नर्सरी काल के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना फसल की सफलता के लिए जरूरी है।
वैज्ञानिक सलाह का सार
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स्थान: जहाँ धूप और पानी की कोई कमी न हो।
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सफाई: गहरी जुताई करके खरपतवार और कीटों का नाश करें।
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पोषण: जैविक खाद को प्राथमिकता दें।
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सुरक्षा: जैविक तरीके से बीज उपचार करके ही बुवाई करें।
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निगरानी: समय-समय पर पानी देते रहें ताकि नर्सरी ट्रांसप्लांट के लिए जल्दी तैयार हो सके।
इन वैज्ञानिक सुझावों का पालन करके किसान कम लागत में स्वस्थ धान की नर्सरी तैयार कर सकते हैं, जो भविष्य में एक बेहतर और बंपर फसल का आधार बनती है।
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