ग्वालियर की बदहाल सड़कों की खुद जांच कराएगा हाईकोर्ट, नगर निगम से पिछले 6 साल का रिकॉर्ड तलब
ग्वालियर की खराब सड़कों को लेकर हाईकोर्ट ने नगर निगम से 6 साल का रिकॉर्ड तलब किया है। गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष पैनल गठित किया गया है, जिसकी रिपोर्ट 13 अगस्त को पेश होगी।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर की जर्जर और बदहाल सड़कों को लेकर पहले भी नगर निगम को कई बार कड़ी फटकार लगा चुका उच्च न्यायालय अब खुद शहर की सड़कों की गुणवत्ता की जांच कराएगा। इस संबंध में कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम से पिछले 6 साल का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है, जिसके लिए अदालत की तरफ से नगर निगम को मात्र एक दिन का समय दिया गया है। अदालत के इस सख्त कदम से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
🚇 "क्या आपने ग्वालियर में सुरंग वाली सड़क देखी है?" - हाईकोर्ट ने निगम कमिश्नर से पूछा सवाल
ग्वालियर हाईकोर्ट बेंच में शहर की खराब और गड्ढेयुक्त सड़कों को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। यहाँ तक कि सुनवाई में पहुँचे नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय से तीखे लहजे में यह भी पूछ लिया कि क्या उन्होंने ग्वालियर में सड़कों वाली सुरंग देखी है? इस पर निगम कमिश्नर ने अदालत को स्पष्ट किया कि शहर के उस विशेष इलाके में वर्ष 2023 में स्टॉर्म वाटर की निकासी के लिए एक लाइन डाली गई थी, जिस पर अदालत ने मामले की गहराई से पड़ताल करने के निर्देश दिए।
👥 सड़कों की जाँच के लिए विशेष पैनल गठित, कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
मामلے के याचिकाकर्ता एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर ने मीडिया को जानकारी दी कि सड़कों की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार की शिकायतों को लेकर हाईकोर्ट ने खुद स्वतंत्र जाँच कराने का बड़ा निर्णय लिया है। इसके लिए एक विशेष पैनल का गठन किया गया है, जिसमें एक वकील हाईकोर्ट की तरफ से और एक वकील नगर निगम का प्रतिनिधित्व करेंगे। इनके साथ ही दो तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्निकल एक्सपर्ट्स) भी इस पैनल का अहम हिस्सा होंगे। यह विशेष दल शहर की विभिन्न सड़कों का निरीक्षण कर उनकी गुणवत्ता की जाँच करेगा और अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट सीधे उच्च न्यायालय को सौंपेगा।
📊 2020 के बाद बनी सड़कों का होगा हिसाब, जाँच के दौरान अधिकारियों का दखल रहेगा वर्जित
हाईकोर्ट द्वारा कराई जा रही इस उच्चस्तरीय जाँच के दायरे में केवल सड़कों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि वर्ष 2020 के बाद से उन पर किए गए सरकारी खर्च का पूरा ब्योरा भी शामिल होगा। अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह हर बदहाल सड़क की मेजरमेंट बुक (MB) भी कोर्ट में जमा करे। इसके साथ ही, वर्ष 2020 के बाद बनाई गई सभी सड़कों की सैंपलिंग इस विशेष दल द्वारा कराई जाएगी, ताकि निर्माण कार्यों के दौरान तय मानकों की असलियत सामने आ सके। हाईकोर्ट ने यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि जब यह पैनल सड़कों की जाँच कर रहा हो, तब मौके पर किसी भी नगर निगम अधिकारी की मौजूदगी या दखलंदाजी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
📅 आगामी 13 अगस्त को होगी मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई
याचिकाकर्ता एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर के अनुसार, अदालत ने नगर निगम को सख्त निर्देश दिए हैं कि आगामी 13 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान सभी माँगे गए दस्तावेज और रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से कोर्ट में प्रस्तुत किए जाएं। जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस कड़े रुख से अब शहर की सड़कों के निर्माण में बरती गई लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की परतें खुलकर सामने आएंगी।
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