बैहर तहसील के गांवों में मलेरिया और टाइफाइड का प्रकोप, स्कूल को बनाया गया अस्पताल
बालाघाट के आदिवासी बहुल गांवों में संक्रमण फैलने से 7 बच्चों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं और पूर्व सीएम कमलनाथ ने पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों से एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आई है। बालाघाट जिले के वनांचल क्षेत्रों में संक्रमण का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि पिछले 40 दिनों के भीतर अलग-अलग गांवों में 7 बच्चों की असामयिक मौत हो चुकी है। बारिश के इस मौसम में बैगा आदिवासी समुदाय के बच्चे इस खतरनाक संक्रमण की चपेट में आ गए हैं, जिसने धीरे-धीरे महामारी का रूप धारण कर लिया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का अमला सक्रिय होकर प्रभावित गांवों में पहुँच गया है और बच्चों के इलाज के साथ-साथ ग्रामीणों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है। वहीं, इस गंभीर मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
🏥 बैहर तहसील के कई गांवों में फैला संक्रमण, स्कूल को बनाया गया अस्थायी अस्पताल
जिला मुख्यालय से लगभग 85 किलोमीटर दूर बैहर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मछुरदा, कोरका, बोंदारी, अडोरी और कुंडेकसा में इन दिनों भारी संक्रमण फैला हुआ है। यहाँ मलेरिया, टाइफाइड, हैजा और फंगल इंफेक्शन जैसी बीमारियां पैर पसार चुकी हैं, जिसके कारण लगभग हर घर में कोई न कोई बच्चा बीमार नजर आ रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांवों में डेरा डाल दिया है और तुरंत राहत पहुँचाने के लिए स्थानीय स्कूल को ही अस्थायी अस्पताल में तब्दील कर दिया है।
📊 96 बच्चे किए गए चिन्हित, 51 स्वस्थ होकर डिस्चार्ज और 45 का इलाज जारी
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर जाकर गंभीर रूप से संक्रमित बच्चों की पहचान की। शुरुआती जांच और त्वरित कार्रवाई के तहत कुल 96 बच्चों को गंभीर रूप से संक्रमित मानते हुए बैहर अस्पताल और जिला चिकित्सालय बालाघाट रेफर किया गया। इनमें से बेहतर इलाज के बाद स्वस्थ हुए 51 बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि अभी भी 45 बच्चों का इलाज निरंतर जारी है।
🩺 स्वास्थ्य विभाग की दलील और ग्रामीणों में जागरूकता की कमी का मुद्दा
सीएमएचओ डॉ. परेष उपलव ने बताया कि शुरुआती दौर में आदिवासी परिवारों द्वारा अस्पताल आने के बजाय पारंपरिक पंडा-पुजारी और झाड़-फूंक पर अधिक भरोसा किया जाता है, जिसके कारण कई बार समय पर इलाज नहीं मिल पाता। उन्होंने बताया कि विभाग की 4 विशेष टीमें लगातार गांवों में सर्वे कर रही हैं और एंबुलेंस की भी विशेष व्यवस्था की गई है। हालांकि, इस पूरी घटना ने एक बार फिर वनांचल क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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