शव लेने नहीं पहुंचे परिजन तो अस्पताल प्रशासन ने शुरू की कानूनी कार्रवाई, मंडरा रहा डीकंपोज होने का खतरा
सीहोर जिला अस्पताल में इलाज के दौरान नवजात की मौत के बाद 17 दिनों से शव मॉर्च्युरी में रखा है। परिजन ने लापरवाही का आरोप लगाकर शव लेने से इनकार कर दिया है।
मध्य प्रदेश के सीहोर जिला अस्पताल में इलाज के दौरान बीते 24 जुलाई को हुई एक नवजात की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृत नवजात के परिजनों ने शव लेने से साफ इनकार कर दिया है। नतीजा यह है कि पिछले 17 दिनों से लगातार बच्ची का शव अस्पताल की मॉर्च्युरी (शवगृह) में ही रखा हुआ है। अब इस स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने मामले की सूचना पुलिस को दे दी है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई में जुट गया है।
⚖️ जन्म के समय था कम वजन, 30 जून को कराया गया था भर्ती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्यामपुर तहसील के सीलखेड़ा गांव की रहने वाली महिला सविता ने 30 जून को एक बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के समय नवजात का वजन काफी कम था, जिसके चलते परिजनों ने आनन-फानन में उसे बेहतर इलाज के लिए सीहोर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती कराया था। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद 24 जुलाई को इलाज के दौरान नवजात ने दम तोड़ दिया।
🛑 डॉक्टर पर इलाज में पारदर्शिता न बरतने का आरोप, 20 जुलाई के बाद अस्पताल नहीं आए परिजन
बच्ची की मौत के बाद जब अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को सूचना दी, तो वे भड़क गए और डॉक्टर पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए शव लेने से मना कर दिया। परिजनों का कहना था कि उन्हें बच्ची की बीमारी की सही जानकारी नहीं दी गई और न ही उसे किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दी गई। दूसरी ओर, अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यू.ए.के. श्रीवास्तव का कहना है कि 20 जुलाई के बाद से परिजन अस्पताल आना बंद कर चुके थे और वे इलाज में सहयोग भी नहीं कर रहे थे।
⚠️ मॉर्च्युरी में शव रखने की समयसीमा पूरी, अस्पताल ने शुरू की प्रशासनिक प्रक्रिया
नियमों के मुताबिक, किसी भी शव को मॉर्च्युरी में अधिकतम दो सप्ताह (14 दिन) तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है, जिसके बाद उसके खराब होने (डीकंपोज होने) का खतरा काफी बढ़ जाता है। घटना को 17 दिन बीत जाने के कारण अब शव के सुरक्षित रहने पर संकट मंडराने लगा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने अब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत करा दिया है, ताकि नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
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