3 साल से बनकर तैयार है संजीवनी क्लीनिक, लोकार्पण न होने पर अब उग्र आंदोलन की चेतावनी

गुना के चाचौड़ा में 3 साल पहले बना संजीवनी क्लीनिक आज भी लोकार्पण के इंतजार में बंद है। क्षेत्रीय लोगों और पार्षदों ने 15 दिन में अस्पताल शुरू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

Aug 12, 2026 - 18:26
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3 साल से बनकर तैयार है संजीवनी क्लीनिक, लोकार्पण न होने पर अब उग्र आंदोलन की चेतावनी

मध्य प्रदेश के गुना जिले के चाचौड़ा से एक अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आम तौर पर किसी इलाके से सड़क, स्कूल या अस्पताल खोले जाने की मांग उठती है, लेकिन यहाँ मामला इसके बिल्कुल विपरीत है—यहाँ मांग उठ रही है कि पिछले तीन साल से बनकर तैयार पड़े 'संजीवनी क्लीनिक' का अगले 15 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से लोकार्पण कराया जाए। राजनीतिक और प्रशासनिक उदासीनता के चलते इस अस्पताल का फीता अब तक नहीं कट पाया है, जिसके कारण आसपास के 40 गांवों की करीब डेढ़ लाख की आबादी को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी 70 किलोमीटर की लंबी दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि किसी अस्पताल के लोकार्पण की मांग को लेकर जनता ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

⏳ 25 लाख की लागत से 2023 में तैयार हुआ था भवन, अब दीवारों पर आने लगी है सीलन

चाचौड़ा के ग्रामीण कौशल सिंह बताते हैं कि यह अस्पताल 2023 में ही पूरी तरह बनकर तैयार हो गया था और तब से लेकर अब तक यह तीन बरसात देख चुका है। लोकार्पण न होने और लंबे समय तक बंद रहने के कारण इस नए भवन में अब सीलन आने लगी है और कई हिस्सों में टूट-फूट भी शुरू हो गई है, जिससे सरकारी संपत्ति बर्बाद हो रही है। ठेकेदार बहादुर सिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने तय समय सीमा के भीतर ही 25 लाख की लागत से इस संजीवनी क्लीनिक का निर्माण पूरा कर दिया था। हालांकि, यह क्लीनिक किसी बड़े अस्पताल की सुविधा तो नहीं दे सकता था, लेकिन जुकाम-बुखार या सामान्य इलाज के लिए गुना तक का चक्कर काटने वाले चाचौड़ा के लोगों के लिए यह एक बड़ी राहत साबित हो सकता था।

🚗 डिलीवरी के लिए भटकने को मजबूर ग्रामीण, 70 किमी दूर जाने की है मजबूरी

स्थानीय निवासी शिवम नामदेव का व्यक्तिगत अनुभव इस बात की गवाही देता है कि इस इलाके को एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की कितनी सख्त जरूरत है। शिवम की भाभी की डिलीवरी के समय चाचौड़ा में कोई भी चिकित्सीय सुविधा न मिलने के कारण उन्हें मजबूरन बीना ले जाना पड़ा था। उन्होंने बताया कि दूर सफर करने और प्राइवेट गाड़ियों का खर्च उठाने के अलावा ग्रामीण जनता को किन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, यह सिर्फ वे ही जानते हैं। यदि यह क्लीनिक समय पर शुरू हो जाता, तो आम जनता को इतनी बड़ी पीड़ा न झेलनी पड़ती।

👩‍⚖️ पार्षद ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, 15 दिन का अल्टीमेटम देकर दी आंदोलन की चेतावनी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम परिषद चाचौड़ा-बीनागंज की पार्षद सुषमा नामदेव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस पूरे मामले से अवगत कराया है। उनका कहना है कि चाचौड़ा का मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहले से ही बदहाल है, जहाँ न डॉक्टर हैं, न पर्याप्त दवाइयां और न ही प्रसव की कोई सुविधा। पार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर अस्पताल का लोकार्पण कर ओपीडी शुरू नहीं की गई, तो वे जनता के साथ सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगी। दूसरी ओर, गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल का कहना है कि मेडिकल स्टाफ की कमी (इश्यू) के कारण इसे शुरू करने में देरी हुई है, और इस पर काम चल रहा है तथा जल्द ही क्लीनिक का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

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