MP ESB Exam News: वन रक्षक और जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा की दूसरी पाली हुई निरस्त, 20 जून को होगी पुन: परीक्षा
मध्य प्रदेश में वन रक्षक, क्षेत्र रक्षक और जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा की दूसरी पाली तकनीकी खामियों के कारण रद्द। नाराज अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन, 20 जून की नई तारीख घोषित।
सतना। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा आयोजित वन रक्षक, क्षेत्र रक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा की द्वितीय पाली रविवार को तकनीकी खामी के कारण रद्द कर दी गई। सतना के आदित्य कॉलेज परीक्षा केंद्र में हजारों अभ्यर्थियों को करीब तीन घंटे तक परीक्षा कक्ष में इंतजार कराया गया, जिसके बाद उन्हें परीक्षा निरस्त होने की सूचना दी गई। इस अव्यवस्था से नाराज छात्रों ने पहले परीक्षा केंद्र के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और फिर पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर धरना दिया।
परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
एनएसयूआई (NSUI) के प्रदेश सचिव आनंद पाण्डेय के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए। छात्रों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और परीक्षा के कारण हुए आर्थिक व मानसिक नुकसान की भरपाई की मांग की है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों से ज्ञापन लिया और उनकी मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन देकर स्थिति को शांत कराया।
दूर-दराज से आए अभ्यर्थियों का दर्द, मजदूरी छोड़कर आए थे परीक्षा देने
इस अव्यवस्था का सबसे अधिक दंश उन अभ्यर्थियों ने झेला जो डिंडोरी, मंडला, छिंदवाड़ा, बालाघाट और जबलपुर जैसे दूरस्थ जिलों से एक दिन पहले ही सतना पहुंच गए थे। डिंडोरी निवासी अभ्यर्थी धर्मेंद्र दुबे, जो मैकेनिक का काम करते हैं, भावुक होकर बोले कि उन्होंने अपनी रोजी-रोटी छोड़कर परीक्षा देने की तैयारी की थी। पूरी रात स्टेशन पर गुजारने और केंद्र में घंटों इंतजार करने के बाद परीक्षा रद्द होने की खबर ने उनकी हिम्मत तोड़ दी। ऐसे में छात्रों का सवाल है कि उनके बर्बाद हुए समय, यात्रा खर्च और मानसिक तनाव की भरपाई कौन करेगा?
20 जून को होगी अगली परीक्षा, छात्रों का असंतोष बरकरार
कर्मचारी चयन मंडल ने रद्द हुई परीक्षा के लिए 20 जून को नई तिथि घोषित कर दी है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि यह निर्णय उनके आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव की भरपाई करने में नाकाफी है। बार-बार होने वाली ऐसी तकनीकी खामियां प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही हैं। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि परीक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में आंदोलन और उग्र होगा।
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