रिनोवेशन के बाद भी भर्तहरि हॉस्टल की खुली पोल, बारिश में कमरों में भरा पानी और सुरक्षा पर उठे सवाल
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रिनोवेशन के बाद भी छत टपकने और सुरक्षा व्यवस्था फेल होने से छात्र परेशान हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहने वाले देश भर से आए विद्यार्थियों के लिए इस बार की बारिश राहत के बजाय बड़ी मुसीबत बन गई है। हाल ही में रिनोवेशन किए जाने के बावजूद भर्तहरि बॉयज हॉस्टल की सीलिंग और कमरों की छतों से पानी टपकने लगा है। स्थिति यह है कि छात्र रात-दिन अपना सामान, किताबें और कपड़े भीगने से बचाने के साथ-साथ कमरों की सफाई करने में जुटे रहते हैं। हॉस्टल के मुख्य प्रवेश द्वार पर जलभराव के चलते छोटे तालाब जैसा नजारा बन गया है। छात्रों का आरोप है कि पानी लीकेज के साथ-साथ साफ-सफाई, सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरों की कमी और बाहरी असामाजिक तत्वों की आवाजाही को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
💸 सालाना 9,600 रुपए फीस, फिर भी बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा का भारी अभाव
विश्वविद्यालय परिसर में कुल 6 छात्रावास संचालित हैं— जिनमें शालिग्राम बॉयज हॉस्टल, भर्तहरि बॉयज हॉस्टल, सान्दीपनि बॉयज हॉस्टल, एमबीए बॉयज हॉस्टल, विधोत्मा गर्ल्स हॉस्टल और रमाबाई गर्ल्स हॉस्टल शामिल हैं। इन हॉस्टल्स में रहने वाले प्रत्येक विद्यार्थी से सालाना लगभग 9,600 रुपए शुल्क वसूला जाता है। अकेले भर्तहरि छात्रावास के करीब 195 कमरों में रहने वाले छात्र इन दिनों गंभीर परेशानियों से जूझ रहे हैं, और अन्य छात्रावासों में भी कमोबेश यही हाल है। महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे दूर-दराज के राज्यों से बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर उज्जैन आए छात्र पढ़ाई के बजाय अपनी बुनियादी सुरक्षा और कमरों को बचाने की जद्दोजहद करने को मजबूर हैं।
🗣️ छात्रों का दर्द और वार्डन का बयान: कुलगुरु को दी जा चुकी है शिकायत
छात्रों ने बताया कि हॉस्टल्स में न तो पर्याप्त सुरक्षा गार्ड हैं और न ही काम करने वाले सीसीटीवी कैमरे, जिससे बाहरी लोगों का बेरोकटोक आना-जाना बना रहता है। खिड़कियों की जालियां टूटने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और कुछ सफाई कर्मियों पर पैसे मांगने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। इस पूरे मामले पर भर्तहरि छात्रावास के वार्डन संग्राम भूषण ने स्वीकार किया है कि उन्होंने कई बार कुलगुरु अर्पण भारद्वाज और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को इन समस्याओं से लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया है। वार्डन के अनुसार मेंटेनेंस और सफाई के लिए समय सीमा दिए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
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