ग्वालियर में ड्रैगन फ्रूट की खेती: बंजर जमीन से होगी मोटी कमाई, कृषि विभाग 20 किसानों को देगा प्रशिक्षण
ग्वालियर कृषि विभाग की नई पहल! कम उपजाऊ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट (कमलम) की खेती को बढ़ावा। 20 वर्षों तक होगी बंपर कमाई।
ग्वालियर। ग्वालियर जिले के किसानों की आय बढ़ाने और उनकी कम उपजाऊ या पथरीली जमीन का सदुपयोग करने के लिए कृषि विभाग अब 'ड्रैगन फ्रूट' जिसे 'कमलम' भी कहा जाता है, की खेती को बढ़ावा देने जा रहा है। कृषि विभाग 'आत्मा परियोजना' के अंतर्गत जिले के 20 ऐसे किसानों का चयन करेगा, जिनके पास कम उपजाऊ भूमि है, ताकि वे कम लागत में अधिक लाभ कमा सकें।
मुगलपुरा के किसान सिद्धार्थ से मिली प्रेरणा
इस खेती की शुरुआत मुगलपुरा गांव के सिद्धार्थ घुरैया ने की है। यद्यपि उनकी पहली फसल अभी आनी बाकी है, लेकिन उनके प्रयासों को देखते हुए विभाग ने इसे बड़े पैमाने पर शुरू करने का मन बनाया है। सिद्धार्थ की पहली फसल जुलाई महीने में आने की संभावना है। उनकी पहल से प्रेरित होकर अब विभाग 20 अन्य किसानों को इस खेती से जोड़ रहा है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती क्यों है फायदेमंद?
कृषि विभाग के बीटीएम मलखान सिंह गेहलोत के अनुसार, इस खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एक बार लागत लगाने के बाद किसान 20 से 25 वर्षों तक लगातार फल प्राप्त कर सकते हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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कम संसाधन: इसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है और यह पथरीली या अर्ध-बंजर जमीन पर भी आसानी से उग जाता है।
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मिट्टी: बलुई दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, इसके लिए सबसे उपयुक्त है।
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समय अवधि: पौधा लगाने के 12 से 15 महीने बाद इसमें फूल और फल आने शुरू हो जाते हैं, और तीसरे वर्ष से यह अपनी पूरी क्षमता के साथ उत्पादन देता है।
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सीजन: भारत में इसका फल आमतौर पर जून-जुलाई से नवंबर-दिसंबर तक प्राप्त होता है।
विभाग का चयन और प्रोत्साहन
विभाग ऐसे किसानों को प्राथमिकता दे रहा है जिनके पास ऐसी जमीन है जहाँ जलभराव की समस्या नहीं है और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में ग्वालियर के अन्य किसानों को भी इस लाभकारी फसल के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे कृषि आय में नई क्रांति आ सकती है।
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