इंदौर की 'भूत बावड़ी' का बदला स्वरूप: संरक्षण के बाद अब सांस्कृतिक कार्यक्रमों का बनी केंद्र
नगर निगम इंदौर ने सदर बाजार की ऐतिहासिक 'भूत बावड़ी' का पुनरुद्धार किया। 'जश्न-ए-इंदौर' कार्यक्रम के जरिए विरासत को मिल रही नई पहचान।
इंदौर। शहर की जल संरचनाओं के संरक्षण और पुनरुद्धार की कड़ी में नगर निगम इंदौर ने एक सराहनीय कदम उठाया है। सदर बाजार स्थित होलकरकालीन ऐतिहासिक 'भूत बावड़ी' का न केवल पुनरुद्धार किया गया, बल्कि इसे एक सुंदर सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। निगम ने बावड़ी की साफ-सफाई, संरचनात्मक मरम्मत, रंग-रोगन और सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाने का कार्य पूर्ण कर इसे एक नया स्वरूप दिया है।
'जश्न-ए-इंदौर' से गूंजा ऐतिहासिक परिसर
'जल गंगा संवर्धन अभियान' के अंतर्गत इस बावड़ी परिसर में 'जश्न-ए-इंदौर' नामक एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और जल संरचनाओं के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम के दौरान इतिहासकार जफर अंसारी ने भूत बावड़ी के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण और रोचक तथ्य साझा किए।
कला और संस्कृति का संगम
सांस्कृतिक संध्या में कथक नृत्यांगना वंशिका एवं तान्या ने अपनी मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं, कवि पलाश ने अपनी कविताओं के माध्यम से इंदौर की संस्कृति, विरासत और सामाजिक मूल्यों को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने वहां उपस्थित नागरिकों, युवाओं और कला प्रेमियों का दिल जीत लिया।
डर की जगह अब गूंजता है संगीत
एक समय था जब 'भूत बावड़ी' के नाम से ही लोग घबराते थे और इस स्थान से जाने से कतराते थे। लेकिन अब नगर निगम के प्रयासों से यह स्थान पूरी तरह बदल चुका है। अब यहां भूतों की कहानियों के बजाय भारतीय शास्त्रीय संगीत, कला और साहित्य की गूंज सुनाई देती है। यह बदलाव न केवल इंदौर की ऐतिहासिक धरोहरों को नया जीवन दे रहा है, बल्कि शहर के नागरिकों को अपनी जड़ों से जुड़ने का एक नया अवसर भी दे रहा है।
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