भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के पवित्र अस्थि कलश लौटे भारत: सांची के चेतियागिरी विहार में आज होंगे स्थापित
भगवान बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र और महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलश मंगोलिया प्रवास से लौटे। आज सांची के चेतियागिरी विहार में होगी विधिवत स्थापना।
भोपाल/सांची। भगवान बुद्ध के परम शिष्यों, सारिपुत्र और महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलश 10 दिवसीय सफल मंगोलिया प्रवास के बाद सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं। बुधवार को भोपाल पहुंचने पर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इन अवशेषों का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष पहल पर आयोजित इस बौद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम ने भारत और मंगोलिया के बीच आध्यात्मिक संबंधों को नई ऊंचाइयां दी हैं।
भावुक विदाई और मंगोलिया में सकारात्मक प्रभाव
मंगोलिया के गंडन तेगचेनलिंग मठ में इन अवशेषों को एक भावुक विदाई दी गई। स्थानीय बौद्ध अनुयायियों और मठाधीशों ने इसे अपने जीवन का सबसे पवित्र अनुभव बताया। मठाधीश खंबा लामा गेशे लहारम्पा डी. जावज़ांडोरज ने कहा कि सारिपुत्र ज्ञान के और महामोग्गलान करुणा के प्रतीक हैं, जिनके आशीर्वाद से मंगोलियाई वातावरण में शांति और सकारात्मकता का संचार हुआ है। विदाई के समय श्रद्धालुओं की आंखों में अश्रु थे, जो इन अवशेषों के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं।
सांची में पुनः प्रतिष्ठापन
दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में विश्राम के बाद, इन पवित्र अवशेषों को गुरुवार को विशेष प्रोटोकॉल के तहत सांची लाया जा रहा है। सांची स्थित 'चेतियागिरी विहार' में इन्हें पुनः विधिवत स्थापित किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा और धार्मिक परंपराओं के साथ सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
भारत-मंगोलिया संबंधों में नई मजबूती
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रवास ने न केवल धार्मिक बल्कि राजनयिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान की है। मंगोलियाई बौद्ध समुदाय के लिए अपनी धार्मिक जड़ों से जुड़ने का यह एक ऐतिहासिक अवसर था। इन पवित्र अस्थि कलशों की सांची में वापसी के साथ ही एक सफल सांस्कृतिक यात्रा का समापन हुआ है।
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