सीहोर के कपिल परमार का फिर बढ़ेगा मान: नागोया एशियन पैरा गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में चयन
सीहोर के पैरा जूडो खिलाड़ी कपिल परमार का एशियन पैरा गेम्स 2026 के लिए चयन। चाय की दुकान से पैरालंपिक तक का प्रेरणादायक सफर, अब जापान में स्वर्ण का लक्ष्य।
सीहोर। सीहोर की माटी के लाल और देश के शीर्ष पैरा जूडो खिलाड़ी कपिल परमार ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कपिल का जापान के नागोया में आयोजित होने वाले 'एशियन पैरा गेम्स 2026' के लिए भारतीय पैरा जूडो टीम में प्रोविजनल चयन हुआ है। इस उपलब्धि के बाद पूरे देश को उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद है। सीहोर विधायक सुदेश राय और अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनके निवास पर पहुंचकर उन्हें बधाई दी।
11 हजार वोल्ट का करंट भी नहीं डिगा सका हौसला
कपिल का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। मात्र 9 वर्ष की आयु में 11 हजार वोल्ट के हाई-टेंशन तार की चपेट में आने से उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित (जे-1 श्रेणी) होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने सीहोर में चाय की छोटी सी दुकान पर बर्तन धोने और चाय बनाने जैसे काम करके अपनी खेल ट्रेनिंग का खर्च निकाला। अपने कोच भगवान दास के मार्गदर्शन में उन्होंने बिना रोशनी के, केवल सामने वाले की आहट और स्पर्श से जूडो के कठिन दांव-पेंच सीखे।
विश्व पटल पर भारत का मान
कपिल परमार की खेल यात्रा असाधारण रही है:
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पेरिस पैरालंपिक 2024: जूडो में देश के लिए इतिहास का पहला कांस्य पदक जीता।
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हंगझू एशियन पैरा गेम्स 2023: रजत पदक अपने नाम किया।
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विश्व रैंकिंग: वे अपने 60 किलोग्राम भारवर्ग में वर्ल्ड नंबर 1 भी रह चुके हैं। उनकी इस अद्भुत यात्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने भी सराहा और सम्मानित किया है।
लक्ष्य: जापान में लहराना है तिरंगा
ईटीवी भारत के साथ बातचीत में कपिल ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और कोच को दिया। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य जापान में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम ऊंचा करना है। उन्होंने कहा, ''मैं एशियन पैरा गेम्स के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहा हूं। मेरा सपना पोडियम पर तिरंगा लहराते देखना है।''
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