छतरपुर में चला प्रशासन का बुलडोजर: PWD की करोड़ों की जमीन से हटाया अतिक्रमण, हिंदू संगठनों के विरोध के बाद कार्रवाई रुकी

छतरपुर में PWD की जमीन खाली कराने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई। 4 मकान गिरने के बाद हिंदू संगठनों के भारी विरोध के चलते प्रशासन को अभियान रोकना पड़ा।

Jun 12, 2026 - 18:40
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छतरपुर में चला प्रशासन का बुलडोजर: PWD की करोड़ों की जमीन से हटाया अतिक्रमण, हिंदू संगठनों के विरोध के बाद कार्रवाई रुकी

छतरपुर। शहर के मुख्य बाजार क्षेत्रों में PWD की सरकारी संपत्ति पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देश पर PWD, नगरपालिका, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने बुलडोजर के साथ अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया। हालांकि, इस दौरान हिंदूवादी संगठनों के विरोध के चलते अभियान को बीच में ही रोकना पड़ा।

 10 मकानों को किया गया था चिन्हित

प्रशासन ने पहले चरण में 10 ऐसे मकानों और भवनों को चिन्हित किया था, जो PWD की सरकारी जमीन पर वर्षों से बने हुए थे। शुक्रवार को शुरू हुई इस कार्रवाई में 4 मकानों को तो बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया, लेकिन इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। PWD अधिकारी आशीष भारती के अनुसार, ये भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में थे और आगामी बारिश के मौसम में किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते थे।

 हिंदू संगठनों का तीखा विरोध

कार्रवाई के दौरान विश्व हिंदू परिषद के प्रखर भट्ट के नेतृत्व में हिंदू संगठनों के पदाधिकारी मौके पर पहुँच गए और अभियान का कड़ा विरोध किया। संगठनों का आरोप है कि जिन मकानों को गिराया जा रहा है, उनमें गरीब और असहाय परिवार रहते हैं, जो मेहनत-मजदूरी कर अपना भरण-पोषण कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन को पहले बड़े माफियाओं और प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाना चाहिए, न कि गरीब परिवारों को सड़क पर लाना चाहिए।

 300 करोड़ की संपत्ति पर वर्षों से है कब्जा

शहर के मुख्य बाजार में PWD की करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर आज भी अवैध कब्जा जमा हुआ है। इसमें 20 से ज्यादा दुकानें और 30 से अधिक पक्के भवन शामिल हैं। विभाग के अनुसार, इन कब्जाधारियों को कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन कोई परिणाम न निकलने पर बुलडोजर का सहारा लेना पड़ा।

 क्या होगा आगे का रुख?

फिलहाल प्रशासन को 4 मकान गिराने के बाद अपनी टीम के साथ वापस लौटना पड़ा। विभाग का तर्क है कि सुरक्षा और दुर्घटना को रोकने के लिए जर्जर भवनों को हटाना अनिवार्य है, जबकि जनता और स्थानीय संगठनों की सहानुभूति गरीब परिवारों के साथ है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन आगे किसी वैकल्पिक व्यवस्था के साथ इस अतिक्रमण अभियान को आगे बढ़ाता है या नहीं।

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