रतलाम में जनसुनवाई व्यवस्था हुई विकेन्द्रीकृत, अब जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत
रतलाम जिले में जनसुनवाई व्यवस्था को विकेन्द्रीकृत कर दिया गया है। अब आवेदकों को जिला मुख्यालय आने की बजाय स्थानीय स्तर पर 7 केंद्रों पर समाधान मिलेगा।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई व्यवस्था को अब पूरी तरह से विकेन्द्रीकृत (Decentralized) कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब दूर-दराज के आवेदकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। नागरिक अब अपने क्षेत्र के नजदीकी अनुविभागीय कार्यालय, जनपद पंचायत या तहसील कार्यालय में बनाए गए जनसुनवाई केंद्रों पर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। रतलाम शहर के भीतर इसके लिए नगर निगम कार्यालय और एसडीएम शहर कार्यालय में विशेष व्यवस्था की गई है।
👥 नागरिकों की सुविधा के लिए कलेक्टर ने उठाया कदम, जिले में बनाए गए कुल 7 केंद्र
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और स्थानीय स्तर पर निराकरण करने के उद्देश्य से रतलाम जिले में तत्काल प्रभाव से इस विकेन्द्रीकृत जनसुनवाई व्यवस्था को लागू किया है। जिला जनसंपर्क अधिकारी ईश्वर चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि अब प्रत्येक मंगलवार को प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे के बीच जिले में कुल 07 निर्धारित केंद्रों पर एक साथ जनसुनवाई संपन्न होगी, जिससे जनता का समय और पैसा दोनों बचेगा।
📍 जानिए किस केंद्र पर कौन से अधिकारी सुनेंगे आपकी समस्याएं
जिले में निर्धारित किए गए सभी 7 प्रमुख जनसुनवाई केंद्रों और वहाँ सुनवाई करने वाले अधिकारियों का विवरण इस प्रकार है:
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नगर पालिक निगम कार्यालय, रतलाम: निगम आयुक्त द्वारा जनसुनवाई की जाएगी।
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अनुविभाग कार्यालय, रतलाम: एसडीएम रतलाम संभालेंगे जिम्मेदारी।
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अनुविभाग कार्यालय, सैलाना: एसडीएम सैलाना द्वारा सुनवाई होगी।
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जनपद पंचायत कार्यालय, बाजना: बाजना विकासखंड के लिए जनपद पंचायत स्तर पर सुनवाई।
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अनुविभाग कार्यालय, जावरा: एसडीएम जावरा द्वारा मामलों का निपटारा।
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जनपद पंचायत कार्यालय, पिपलौदा: पिपलौदा विकासखंड के लिए जनपद स्तर पर अधिकारी मौजूद रहेंगे।
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अनुविभाग कार्यालय, आलोट: एसडीएम आलोट द्वारा शिकायतों की सुनवाई की जाएगी।
इन केंद्रों पर राजस्व, पंचायत, ग्रामीण विकास, खाद्य, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, विद्युत और कृषि सहित विभिन्न विभागों के सक्षम अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। जिला स्तर पर अब केवल वही जटिल मामले भेजे जाएंगे, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर होना संभव नहीं होगा।
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