रीवा: निलंबित उपयंत्री का अनोखा विरोध, आर्थिक तंगी के चलते प्रशासन से मांगी 'भीख मांगने' की अनुमति

रीवा में निलंबित उपयंत्री राजेश प्रताप सिंह ने भीख मांगने की अनुमति मांगी। 10 महीने से भत्ता न मिलने से परेशान, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी विभाग बेपरवाह।

Jun 12, 2026 - 18:43
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रीवा: निलंबित उपयंत्री का अनोखा विरोध, आर्थिक तंगी के चलते प्रशासन से मांगी 'भीख मांगने' की अनुमति

रीवा। मऊगंज नगर परिषद में पदस्थ रहे निलंबित उपयंत्री राजेश प्रताप सिंह ने अपने ही विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे उपयंत्री ने नगरीय प्रशासन के संभागीय अधिकारी को एक पत्र सौंपकर 'भीख मांगने' की अनुमति मांगी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे संयुक्त संचालक कार्यालय के बाहर कटोरा लेकर बैठ जाएंगे।

 क्या है पूरा मामला?

राजेश प्रताप सिंह का कहना है कि उन्हें एक ऐसे नाली निर्माण कार्य के मामले में निलंबित किया गया है, जिसके लिए वे जिम्मेदार ही नहीं थे। उनका कहना है कि जिस समय निर्माण कार्य हुआ, वे मऊगंज नहीं, बल्कि रीवा के जिला शहरी विकास संयुक्त संचालक कार्यालय में पदस्थ थे। लगभग 10 माह पूर्व सीएम हेल्पलाइन में हुई शिकायत के आधार पर हुई यह कार्रवाई आज उनके परिवार के लिए भरण-पोषण का संकट बन गई है।

 हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी राहत नहीं

उपयंत्री ने आरोप लगाया कि निलंबन के 10 महीने बाद भी उन्हें न तो आरोप पत्र (Charge Sheet) दिया गया और न ही नियमानुसार 'जीवन निर्वाह भत्ता' जारी किया गया। उन्होंने बताया कि जबलपुर हाईकोर्ट से भत्ता जारी करने के आदेश भी प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने खुद को इस पूरे प्रकरण में 'बलि का बकरा' बताया है।

 प्रशासन का पक्ष

वहीं, नगरीय प्रशासन के संभागीय अधिकारी हिमांशु भट्ट का कहना है, "राजेश प्रताप सिंह का पत्र प्राप्त हुआ है। हम इस पत्र को शासन को भेजकर अग्रिम कार्रवाई करेंगे। निलंबन के 90 दिन बाद चार्जशीट न होने पर नियमतः निलंबन स्वतः समाप्त हो जाता है, जिसके बाद हमने उन्हें हनुमना में पदस्थ किया था, लेकिन उन्होंने वहाँ ज्वाइनिंग नहीं ली।"

 क्या है अंतिम विकल्प?

उपयंत्री का कहना है कि उन्हें अब तक रिलीव भी नहीं किया गया है, जिससे वे न तो पुरानी जगह काम कर पा रहे हैं और न ही नई जगह ज्वाइन कर पा रहे हैं। इस प्रशासनिक पेंच में फँसे उपयंत्री के पास अब भीख मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। यह मामला अब रीवा के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

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