90 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारत पर क्या होगा असर?
पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान समझौता खत्म होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा।
कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से भारी तेजी देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में पिछले लगभग छह महीनों से चला आ रहा तनाव खत्म होने के बजाय और गहराता जा रहा है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। जब भी वैश्विक बाजार में ईंधन के दाम बढ़ते हैं, तो उसका सीधा और गहरा असर भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में कच्चे तेल के महंगे होने से आने वाले दिनों में भारतीय उपभोक्ताओं के रसोई और यात्रा बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
📈 90 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड, अमेरिकी बाजार में भी दर्ज की गई तेजी
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल के हालिया आंकड़ों को समझें, तो ब्रेंट क्रूड वायदा 7 सेंट या 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 90.94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा में भी 53 सेंट यानी 0.63 प्रतिशत की तेजी आई है, जिसके बाद यह 85.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। खास बात यह है कि ब्रेंट और WTI दोनों ही क्रूड अपने पिछले कई हफ्तों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच चुके हैं, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
⚡ अमेरिका-ईरान समझौते की मियाद खत्म और होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराता खतरा
इस पूरी उठापटक के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम समझौते की मियाद का खत्म होना है। जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत 60 दिनों का समय शांति वार्ता के लिए तय किया गया था, जो बिना किसी नई डील के समाप्त हो गया। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इसके अलावा, रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा को लेकर बनी लगातार अनिश्चितता ने तेल बाजार की चिंताओं को और गहरा कर दिया है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतों को लगातार समर्थन मिल रहा है।
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