Guna News: प्रदूषण और अतिक्रमण से कराह रही गुनिया नदी, सौंदर्यीकरण के लिए शुरू हुई कवायद
गुना की गुनिया नदी को बचाने के लिए केंद्र सरकार की टीम ने किया निरीक्षण। 80-100 करोड़ रुपये की योजना से होगा नदी का सौंदर्यीकरण और पुनर्जीवन।
गुना। शहर के बीचों-बीच बहने वाली गुनिया नदी, जो कभी गुना की जीवनदायिनी थी, आज प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। अब इस नदी को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार ने कदम आगे बढ़ाए हैं। जल शक्ति मंत्रालय के तहत 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) की प्रोजेक्ट ऑफिसर डॉ. कीर्ति वर्मा ने गुना पहुँचकर नदी के सौंदर्यीकरण और संरक्षण की संभावनाओं का जायजा लिया।
8 प्रमुख स्थलों का हुआ दौरा
दिल्ली से पहुंची टीम ने कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के साथ मिलकर सिंगवासा तालाब से लेकर सकतपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) तक के 8 प्रमुख स्थानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नदी के प्रवाह, जल प्रदूषण के स्तर और अतिक्रमण की स्थिति को बारीकी से देखा। प्रशासन ने ड्रोन सर्वे और वीडियोग्राफी के माध्यम से नदी के वर्तमान हालातों और पिछले वर्षों में किए गए सुधारों का विवरण टीम के समक्ष रखा।
100 करोड़ की परियोजना और मास्टर प्लान
प्रस्तावित योजना के अनुसार, यदि गुनिया नदी को 'नमामि गंगे' प्रोजेक्ट में शामिल किया जाता है, तो इसके पुनर्जीवन के लिए 80 से 100 करोड़ रुपये की राशि मिलने की संभावना है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) ने इसके लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया है। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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स्टॉप डैम: नदी पर 4 नए स्टॉप डैम का निर्माण।
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पाथ-वे: किनारों पर पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए विशेष रास्ता।
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ऊर्जा संरक्षण: सोलर आधारित लाइटिंग सिस्टम का उपयोग।
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स्व-संचालित मॉडल: पूरी परियोजना को 'सेल्फ सस्टेनेबल' आधार पर विकसित किया जाएगा।
तकनीकी अध्ययन और भविष्य की राह
बैठक के दौरान डॉ. कीर्ति वर्मा ने तकनीकी बारीकियों पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी परियोजना की सफलता के लिए उसका 'साइंटिफिक स्टडी' होना आवश्यक है। इसमें हाइड्रोलॉजिकल स्टडी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट को प्राथमिकता दी जाएगी। नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सीवरेज नेटवर्क और एसटीपी की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
पर्यावरण और शहर का विकास
यह परियोजना न केवल गुनिया नदी को जलकुंभी और गंदगी से मुक्ति दिलाएगी, बल्कि शहर के पर्यावरणीय संतुलन और नागरिक सुविधाओं के लिए भी एक बड़ा कदम साबित होगी। प्रशासन का दावा है कि नागरिकों के सहयोग से नदी के किनारों पर सकारात्मक परिवर्तन पहले ही शुरू हो चुके हैं, और अब बड़े स्तर पर होने वाले विकास कार्यों से गुना का चेहरा बदल जाएगा।
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