Kanha Tiger Reserve: कान्हा में 'सीडीवी' वायरस का कहर, संक्रमित बाघ की हालत में हो रहा सुधार; जानें वर्तमान स्थिति
कान्हा टाइगर रिजर्व में सीडीवी वायरस से संक्रमित बाघ का इलाज मुक्की सेंटर में जारी। विशेषज्ञों की निगरानी में बाघ की सेहत में धीरे-धीरे सुधार।
मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में सीडीवी (Canine Distemper Virus) का खतरा लगातार बना हुआ है। हाल ही में किसली रेंज के संदूकखोल क्षेत्र में मिला तीन वर्षीय बाघ इस वायरस के साथ-साथ रक्त संबंधी बीमारी से भी पीड़ित पाया गया है। जबलपुर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ की जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद, बाघ को मुक्की के क्वारंटाइन सेंटर में रखकर उपचार किया जा रहा है। 24 घंटे निगरानी के बीच अब बाघ की हालत में मामूली सुधार देखने को मिला है।
🧠 सीडीवी का मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, सीडीवी वायरस का असर बाघ के मस्तिष्क पर भी पड़ा है, जिससे उसकी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हुई है। तीन वर्षीय यह बाघ पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुका है। डॉक्टरों का मानना है कि यदि यह बाघ पूरी तरह स्वस्थ भी हो जाता है, तब भी उसे खुले जंगल में छोड़ना सुरक्षित नहीं होगा, क्योंकि वह अब शिकार करने या खुद को बचाने में पूरी तरह सक्षम नहीं रह पाएगा। कान्हा में पूर्व में भी अमाही बाघिन और महावीर बाघ समेत कई बाघों की मौत सीडीवी के कारण हो चुकी है, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।
🩺 विशेषज्ञों की टीम 24 घंटे कर रही निगरानी
बाघ के उपचार के लिए मध्य प्रदेश के शीर्ष पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम लगातार सक्रिय है। जबलपुर और भोपाल के विशेषज्ञों के साथ-साथ वाइल्डलाइफ कंजरवेशन ट्रस्ट (WCT) के डॉक्टर भी समय-समय पर परामर्श दे रहे हैं। बाघ की प्रत्येक गतिविधि पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे नजर रखी जा रही है। वर्तमान में बाघ खुद उठकर खड़ा तो हो पा रहा है, लेकिन अभी भी वह भोजन करने में असमर्थ है, जिसे लेकर चिकित्सक बेहद सावधानी बरत रहे हैं।
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