अनसूटेबल पाए जाने पर दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट होंगे छात्र, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ग्वालियर-चंबल संभाग के 130 नर्सिंग कॉलेजों में बिना सीबीआई जांच के परीक्षाएं नहीं होंगी। अनसूटेबल कॉलेज मिलने पर छात्रों को अन्य संस्थानों में शिफ्ट किया जाएगा।
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले में छात्रों का भविष्य अभी भी अधर में लटका हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने नर्सिंग मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक ग्वालियर-चंबल संभाग के 130 नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें परीक्षा करवाने का कोई अधिकार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ किया है कि यदि जांच के दौरान ये कॉलेज 'सूटेबल' (मानकों पर खरे) नहीं पाए जाते हैं, तो उनके अध्ययनरत छात्रों को सुरक्षित भविष्य के लिए दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट किया जाएगा। कॉलेज खुद अपनी जांच कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन अदालत ने साफ कहा है कि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश लाने होंगे।
📚 10,000 छात्रों का भविष्य दांव पर, 2021-22 सत्र से चक्कर काट रहे हैं युवा
नर्सिंग छात्रों की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। वर्ष 2021-22 के दौरान ग्वालियर-चंबल संभाग के इन 130 नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले लगभग 10,000 छात्र आज भी अपनी परीक्षाओं और डिग्रियों को पाने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इन तमाम कॉलेजों में अभी तक परीक्षाओं के आयोजन की अनुमति नहीं मिल पाई है। जनहित याचिका दायर करने वाले एडवोकेट विशाल बघेल ने बताया कि इन कॉलेजों ने पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में परीक्षा कराने की अनुमति मांगी थी, जहाँ से राहत न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
🔍 हाईकोर्ट ने भी खारिज किए आवेदन, बिना स्पष्टीकरण के जांच से किया इनकार
इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी समानांतर सुनवाई चल रही है, जहाँ कई कॉलेजों ने खुद आगे आकर यह गुहार लगाई थी कि वे अपनी सीबीआई जांच कराने को तैयार हैं, लिहाजा उन्हें परीक्षा और पढ़ाई की अनुमति दी जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस पर तुरंत सहमति जताने से इनकार करते हुए कहा कि सीबीआई जांच के संबंध में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण और निर्देश प्राप्त करने होंगे। गौरतलब है कि सबसे ज्यादा गड़बड़ियां और फर्जीवाड़े के मामले ग्वालियर-चंबल संभाग से ही सामने आए थे, जिसके बाद यह मामला सबसे पहले अदालत की चौखट तक पहुँचा था और हजारों बच्चों का भविष्य संकट में पड़ गया था।
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