शहडोल में रॉकेट की गति से बढ़े प्याज के दाम, खुले बाजार में ₹60 प्रति किलो पहुंचा भाव, जनता परेशान

शहडोल में प्याज के दाम बढ़कर 60 रुपये किलो पहुंच गए हैं। बढ़ती कीमतों और महंगाई के पीछे स्टॉकिस्टों की जमाखोरी और सप्लाई चेन की समस्या मुख्य वजह है।

Aug 27, 2026 - 18:36
Updated: 1 day ago
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शहडोल में रॉकेट की गति से बढ़े प्याज के दाम, खुले बाजार में ₹60 प्रति किलो पहुंचा भाव, जनता परेशान

सावन के महीने में एक तरफ जहां पकवानों की खुशबू फैलती है, वहीं दूसरी ओर रसोई की सबसे जरूरी चीज यानी प्याज के दाम रॉकेट की गति से बढ़कर आम लोगों की चिंता बढ़ाने लगे हैं। शहडोल सब्जी मंडी में इन दिनों प्याज के बढ़ते दामों ने उपभोक्ताओं का बजट बिगाड़ दिया है। कुछ दिन पहले तक जो प्याज 40 से 45 रुपये किलो बिक रहा था, वह अचानक बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। सब्जी विक्रेताओं और आम नागरिकों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले दिनों में प्याज के दाम 100 रुपये का आंकड़ा भी पार कर सकते हैं, जिससे थाली का स्वाद फीका पड़ना तय माना जा रहा है।

📈 क्यों बढ़ रहे हैं प्याज के दाम? स्टॉकिस्टों की जमाखोरी और सप्लाई चेन में खलल

प्याज की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे कारोबारियों और जानकारों ने कई बड़ी वजहें बताई हैं। थोक व्यापारियों के अनुसार, इस बार स्टॉकिस्टों ने बड़े पैमाने पर प्याज खरीदकर स्टॉक और जाम कर दिया है, जिसके कारण खुले बाजार में मांग के मुकाबले आपूर्ति कम हो रही है। इसके अलावा, मार्च-अप्रैल में रबी सीजन के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान हुआ था, जिससे कोल्ड स्टोरेज में रखी पुरानी फसल पर दबाव बढ़ा है। वहीं, खरीफ सीजन की नई फसल के आने में हो रही देरी और मानसून के उतार-चढ़ाव ने भी पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है।

🌾 क्या किसानों को मिल रहा है बढ़े हुए दामों का फायदा? बिचौलियों की चांदी

बाजार में भले ही प्याज 60 रुपये किलो बिक रहा हो, लेकिन इसका असल फायदा मेहनतकश किसानों को नहीं मिल पाता है। भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, एक एकड़ में प्याज की खेती करने पर खाद, बीज, मजदूरी और दवाइयों का भारी खर्च आता है, जिससे किसान को 1 किलो प्याज की लागत लगभग 7 से 8 रुपये पड़ती है। जब किसान फसल बेचने मंडी जाता है, तो उसे थोक में बमुश्किल 10 से 15 रुपये का ही मुनाफा मिल पाता है। लघु और सीमांत किसानों के पास लंबे समय तक फसल रोकने की सुविधा नहीं होती, इसलिए वे तुरंत अपनी उपज बेच देते हैं। इस पूरी महंगाई का असली मुनाफा बिचौलियों, आढ़तियों और बड़े स्टॉकिस्टों की झोली में जाता है।

🏆 मध्य प्रदेश का प्याज उत्पादन: शाजापुर कहलाता है राज्य का 'ओनियन हब'

भारत में महाराष्ट्र के बाद मध्य प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है, जो कुल उत्पादन का 14 से 15 प्रतिशत हिस्सा योगदान करता है। राज्य के मालवा और निमाड़ क्षेत्र में प्याज की बंपर पैदावार होती है। शाजापुर जिला पूरे मध्य प्रदेश में प्याज उत्पादन में पहले स्थान पर है, जिसे 'ओनियन हब' भी कहा जाता है। इसके अलावा इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, राजगढ़, खंडवा, खरगोन और बड़वानी के साथ-साथ बुंदेलखंड के सागर जिले में भी रबी और खरीफ दोनों सीजन में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती की जाती है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था और कृषि बाजार को मजबूती देती है।

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