छिंदवाड़ा में पीओपी की मूर्तियों की धड़ल्ले से बिक्री, कुंभकार समाज ने कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग

छिंदवाड़ा में प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों की बिक्री पर रोक के बावजूद बाहर से माल आ रहा है। कुंभकार समाज ने कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Aug 27, 2026 - 18:40
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छिंदवाड़ा में पीओपी की मूर्तियों की धड़ल्ले से बिक्री, कुंभकार समाज ने कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग

गणेशोत्सव और दुर्गापूजा के पावन अवसर पर देशभर में धूमधाम से देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। लेकिन इन मूर्तियों को तैयार करने में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और हानिकारक केमिकल वाले रंगों का उपयोग पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। प्रशासनिक सख्ती और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद छिंदवाड़ा के बाजारों में पीओपी से बनी मूर्तियां खुलेआम बेची जा रही हैं। स्थिति से परेशान होकर छिंदवाड़ा के कुंभकार प्रजापति समाज ने कलेक्टर से मुलाकात कर बाहर से पीओपी की मूर्तियां लाकर बेचने वाले व्यापारियों पर सख्त लगाम लगाने की गुहार लगाई है।

🚫 प्रतिबंध के बावजूद बाजार में धड़ल्ले से एंट्री: कुंभकार समाज का व्यापार हो रहा ठप

जिला प्रशासन ने कुछ समय पहले एसडीएम की अध्यक्षता में स्थानीय मूर्तिकारों और विक्रेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जल प्रदूषण को रोकने के लिए कोई भी कुंभकार समाज का व्यक्ति पीओपी की मूर्ति न तो बनाएगा और न ही बेचेगा। इसके अलावा 10 फीट से अधिक ऊंची मूर्तियां बनाने पर भी पाबंदी लगाई गई थी। कुंभकार समाज के जिला अध्यक्ष शीतल मालवीय ने बताया कि उनका पूरा समाज प्रशासन के नियमों का पालन करते हुए केवल प्राकृतिक और देसी मिट्टी से मूर्तियां तैयार कर रहा है। लेकिन कुछ बाहरी व्यापारी ट्रकों में भरकर पीओपी की मूर्तियां छिंदवाड़ा ला रहे हैं, जिससे स्थानीय पारंपरिक कारीगरों का रोजगार पूरी तरह संकट में पड़ गया है।

⚠️ 4 साल से मिल रहे सिर्फ आश्वासन: चार फाटक इलाके में सज जाता है पीओपी का बाजार

कुंभकार समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे पिछले 4 वर्षों से लगातार प्रशासन को इस अवैध कारोबार की शिकायत दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई कड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिलती। हर साल गणेश स्थापना के कुछ दिन पहले शहर के चार फाटक इलाके में ओवरब्रिज के नीचे पीओपी की मूर्तियों का बड़ा बाजार सज जाता है। बाहर के व्यापारी इन हल्की और कम लागत में बनने वाली मूर्तियों को कम दाम में बेचते हैं, जिससे ग्राहक उनकी तरफ आकर्षित हो जाते हैं। स्थानीय कारीगरों का कहना है कि अगर बाहर के व्यापारी भी मिट्टी की मूर्तियां बेचें तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन रासायनिक और पीओपी की मूर्तियों पर पूरी तरह सख्ती होनी चाहिए।

🔍 झूठे दावों और मिलावट से सावधान: ऐसे पहचानें असली और नकली मूर्तियां

कुंभकार समाज ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बाजार में खरीदते समय सतर्क रहें। बाहर से पीओपी की मूर्तियां लाकर बेचने वाले व्यापारी अक्सर ग्राहकों से झूठ बोलते हैं कि ये मूर्तियां विशेष चाक या देसी मिट्टी से बनी हैं इसलिए हल्की हैं। जबकि हकीकत यह है कि पीओपी की मूर्तियां बहुत चिकनी, वजन में हल्की और पानी में न घुलने वाली होती हैं, साथ ही इनमें इस्तेमाल होने वाले रंग बेहद जहरीले होते हैं। इसके विपरीत, शुद्ध मिट्टी से बनी मूर्तियां थोड़ी खुरदुरी लेकिन वजनदार और पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल होती हैं। इस मामले में एसडीएम सुधीर जैन ने आश्वस्त किया है कि शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी और बाजार में पीओपी की मूर्तियां बेचने वालों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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