Bandhavgarh Tiger Reserve: बाघों के गढ़ में मादा भालू की मौत से हड़कंप, वन विभाग ने शुरू की जांच
उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र में एक मादा भालू का शव मिलने से हड़कंप। वन विभाग ने पोस्टमार्टम के बाद किया अंतिम संस्कार, मौत के कारणों की जांच जारी।
उमरिया: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को बाघों का गढ़ माना जाता है। अब इसी टाइगर के गढ़ में एक भालू की मौत से हड़कंप मचा हुआ है। अचानक हुई भालू की मौत के बाद टाइगर रिजर्व के अधिकारी और कर्मचारी इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर इसकी जान कैसे गई।
मिली जानकारी के अनुसार, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा सब-डिवीजन के अंतर्गत पनपथा बफर परिक्षेत्र की 'बीट जगुआ' में भालू का शव मिला। जब वन अमला नियमित गश्ती कर रहा था, उसी दौरान एक मादा भालू के शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई। घटना की सूचना तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। तत्काल घटनास्थल को चारों ओर से सुरक्षित कर आसपास के क्षेत्र में सघन सर्च अभियान चलाया गया, लेकिन मौके पर कुछ भी संदेहास्पद नहीं पाया गया।
🔥 पोस्टमार्टम के बाद हुआ अंतिम संस्कार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के मुताबिक, "यह घटना पनपथा बफर परिक्षेत्र की है। बीट जगुआ में नियमित गश्ती के दौरान एक मादा भालू का शव पाए जाने की सूचना मिली थी। तत्काल घटनास्थल को सुरक्षित कर सघन सर्चिंग की गई। मौके पर मृत्यु के संबंध में कुछ भी संदेहास्पद नहीं मिला है। पोस्टमार्टम के बाद पूरे नियम-कानून के साथ शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।"
❓ कैसे हुई भालू की मौत?
भालू की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पशु चिकित्सकों द्वारा उसका परीक्षण किया गया। जांच में भालू के सभी संवेदनशील अंग सुरक्षित पाए गए हैं। प्रथम दृष्टया मृत्यु का कारण प्राकृतिक मौत माना जा रहा है। शव परीक्षण में भालू का पेट खाली मिला और वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर व वृद्ध हो चुकी थी। भालू की उम्र लगभग 8 से 9 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
फिर भी, घटनाक्रम की विस्तृत विवेचना जारी है। मृत्यु का सटीक कारण स्पष्ट करने के लिए प्रयोगशाला परीक्षण हेतु बिसरा (Viscera) के आवश्यक सैंपल एकत्रित किए गए हैं। शव विच्छेदन (पोस्टमार्टम) के बाद शासन के जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अवशेषों को आग में जलाकर नष्ट कर दिया गया।
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