नेपाल और चीन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी, जानिए क्यों आई भोटेकोशी नदी में भयानक बाढ़

नेपाल की भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। बाढ़ के कारणों को लेकर नेपाल और चीन के बीच विवाद गहरा गया है।

Aug 27, 2026 - 19:22
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नेपाल और चीन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी, जानिए क्यों आई भोटेकोशी नदी में भयानक बाढ़

नेपाल में बुधवार (26 अगस्त) को भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से पूरे देश में त्राहिमाम मचा हुआ है। सरकार के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक इस भयंकर जल प्रलय के कारण लगभग 15 अरब रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। इस आपदा में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद से काठमांडू से लेकर बीजिंग तक राजनीतिक गलियारों में बाढ़ के कारणों को लेकर जोरदार हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। नेपाल इस तबाही के लिए सीधे तौर पर चीन की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहरा रहा है।

🏔️ नेपाल में बाढ़ कैसे और क्यों आई? सामने आईं तीन अलग-अलग थ्योरी

विशेषज्ञों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल में आई इस भयावह बाढ़ के पीछे मुख्य रूप से तीन थ्योरी सामने आ रही हैं। पहली थ्योरी के मुताबिक तिब्बत के ग्योरिंग के पास एक भीषण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ, जिससे ग्लेशियर टूट गया। दूसरी थ्योरी भूकंप से जुड़ी है, जिसमें कहा जा रहा है कि भूकंप के कारण तिब्बत में लैंडस्लाइड हुआ और वहां स्थित एक झील का डैम टूटने से जल विस्फोट हो गया। वहीं तीसरी थ्योरी यह कहती है कि पहले नेपाल में भूकंप आया, जिसके बाद हुए भूस्खलन से नदी का प्राकृतिक मार्ग बंद हो गया और पानी ने अपना रास्ता बदलकर भोटेकोशी में भयंकर तबाही मचा दी।

⚠️ बड़ा सवाल—आखिर इस जल प्रलय का असली जिम्मेदार कौन है?

इस पूरी तबाही को लेकर मुख्य रूप से तीन बड़े विवादित पहलू सामने आए हैं:

  1. चीन पर जानकारी छिपाने का आरोप: नेपाल का आरोप है कि चीन ने बाढ़ और खतरे की चेतावनी देने में 45 मिनट की भारी देरी की, जिसके चलते समय रहते हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर नहीं पहुंचाया जा सका। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' समेत सभी दलों ने भारत, चीन और नेपाल के बीच मौसम का पूर्वानुमान साझा करने के लिए एक मजबूत और साझा इनफॉर्मेशन चैनल बनाने की मांग की है।

  2. चीन की खतरनाक झीलें: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (ICIMOD और UNDP) की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास 3,624 हिमनद झीलें हैं, जिनमें से 47 बेहद खतरनाक और 8 को अत्यधिक विस्फोटक माना गया है। ये सभी झीलें चीन के हिस्से में आती हैं, और आशंका जताई जा रही है कि फटने वाली झीलें भी वहीं की थीं।

  3. भूकंप और लैंडस्लाइड के लोकेशन पर सस्पेंस: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का कहना है कि भूकंप के तुरंत बाद लैंडस्लाइड की घटना घटी, हालांकि उन्होंने इसका सटीक स्थान नहीं बताया। वहीं चीनी दूतावास का दावा है कि भूकंप और लैंडस्लाइड दोनों नेपाल के भीतर ही हुए थे, और चीनी पक्ष ने केवल अपनी तरफ से नेपाल को इसकी सूचना दी थी।

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