जोधपुर और बालमुकुंद समेत कई बड़ी दुकानों से लिए गए सैंपल, महीनों बाद आएगी जांच रिपोर्ट
ग्वालियर में रक्षाबंधन के मौके पर मिलावटी मावे और मिठाइयों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। खाद्य विभाग की सुस्त कार्रवाई और भोपाल लैब पर निर्भरता से मिलावटखोर बेखौफ हैं।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शहरवासियों की सेहत के साथ बड़े पैमाने पर खिलवाड़ का मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने त्योहार के इस सीजन में कोई ठोस और व्यापक अभियान चलाने के बजाय केवल 'रूटीन सैंपलिंग' का दिखावा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो मिलावटी मिठाइयां लोग खरीद चुके हैं या जिनका सेवन कर चुके हैं, उनकी जांच रिपोर्ट महीनों बाद (संभवतः दीपावली के आसपास) आएगी। रिपोर्ट आने में इतनी लंबी देरी के कारण समय रहते मिलावटखोरों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
📦 ग्वालियर बना मिलावटी मावे का ट्रांसपोर्ट हब: राजस्थान और भिंड-मुरैना से आ रही अवैध खेप
आसपास के इलाकों जैसे राजस्थान, भिंड और मुरैना से रोजाना हजारों किलो मावा और संदिग्ध खाद्य सामग्री ग्वालियर लाई जा रही है। शहर को एक तरह से मिलावटी मावे का 'ट्रांसपोर्ट हब' बना दिया गया है, और इतनी बड़ी मात्रा में आ रहे इस माल के पास कोई वैध दस्तावेज या बिल भी नहीं होते हैं। इसके बावजूद खाद्य विभाग ने कोई विशेष और सघन जांच अभियान नहीं चलाया। केवल इक्का-दुक्का शिकायतें मिलने पर औपचारिकता के तौर पर कुछ खेप पकड़कर खानापूर्ति कर दी गई।
🔍 खाद्य विभाग की 3 बड़ी लापरवाहियां: एनालॉग पनीर से लेकर गोदामों की अनदेखी
इस पूरी व्यवस्था में विभाग की कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं:
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एनालॉग पनीर पर ढिलाई: प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए जा चुके 'एनालाग पनीर' की एक दिन में 300 किलो जब्ती और सैंपलिंग करने के बाद विभाग ने आगे कोई गहन छानबीन नहीं की।
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गोदामों और निर्माण स्थलों की अनदेखी: शहर के बड़े मिठाई निर्माताओं के उन बड़े गोदामों और कारखानों की जांच नहीं की गई जहाँ असल में भारी मात्रा में मिठाइयां तैयार होती हैं। इन जगहों पर साफ-सफाई, हाइजीन और खाद्य मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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सुस्त कार्यप्रणाली: आम तौर पर त्योहारों के दौरान बहुत पहले से लगातार सर्चिंग और चेकिंग ड्राइव चलाई जानी चाहिए, लेकिन यहां विभाग केवल जनसुनवाई में शिकायत मिलने के बाद ही नींद से जागता है।
🧪 भोपाल लैब के भरोसे ग्वालियर: कब आएगी सैंपल्स की रिपोर्ट?
ग्वालियर की अपनी स्थानीय खाद्य प्रयोगशाला (Lab) अब तक शुरू नहीं हो सकी है। यही वजह है कि ग्वालियर से भेजे जाने वाले सैकड़ों सैंपल्स की जांच के लिए विभाग को पूरी तरह भोपाल स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला पर निर्भर रहना पड़ता है। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जिन प्रतिष्ठित दुकानों से सैंपल लिए गए हैं, उनमें अभिहित अधिकारी डॉ. मेघ सिंह सागर के मार्गदर्शन में जोधपुर मिष्ठान भंडार से बेसन लड्डू व सोनपापड़ी, बालमुकुंद मिष्ठान भंडार से बेसन लड्डू व घेवर, तथा रामकृष्ण मिष्ठान भंडार से मावा बर्फी व छेना स्वीट्स के सैंपल शामिल (अधिकारी लोकेन्द्र सिंह, निरूपमा शर्मा और सतीश कुमार धाकड़ द्वारा) हैं। इन सभी को भोपाल लैब भेजा गया है, लेकिन रिपोर्ट कब आएगी इसकी कोई निश्चित गारंटी नहीं है। जब तक रिपोर्ट हाथ लगेगी, तब तक मिलावटी सामान लोगों के पेट में जा चुका होगा।
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