जीतू पटवारी के नेतृत्व में संगठन में बदलाव की तैयारी, जिला और संभाग स्तर पर बनेगी आम सहमति
मध्य प्रदेश कांग्रेस में नियुक्तियों को लेकर विवादों से बचने के लिए पार्टी ने समन्वय समिति की मुहर लगवाने का फैसला किया है। जानिए क्या है पूरी रणनीति।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के भीतर होने वाली नियुक्तियों को लेकर अक्सर विवाद और विरोध की स्थिति देखने को मिलती है। कई मामलों में तो नियुक्तियां तक निरस्त करनी पड़ती हैं या डैमेज कंट्रोल करना पड़ता है, जिससे संगठन की कार्यप्रणाली और गतिविधियां प्रभावित होती हैं। आगामी महीनों में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक विभिन्न इकाइयों में नई नियुक्तियां होनी हैं। इस बार किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पार्टी ने एक सख्त और व्यवस्थित नीति अपनाई है। अब जिला और संभाग स्तर पर गठित समन्वय समिति की हरी झंडी मिलने के बाद ही किसी भी नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।
🔄 संगठन सृजन अभियान और पिछले अनुभवों से लिया सबक: अब फूंक-फूंककर रख जा रहे कदम
पिछले दो सालों से कांग्रेस पार्टी प्रदेश में संगठन के सशक्तीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का हमेशा से यही प्रयास रहा है कि आपसी समन्वय और आम सहमति से नियुक्तियां की जाएं। हालांकि, जिला अध्यक्षों के चयन के दौरान कई जिलों में भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे जो भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय तक पहुंच गए थे। इन अनुभवों से सबक लेते हुए जिला कार्यकारिणी के गठन में जब स्थानीय वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श किया गया, तो शिकायतों में काफी कमी आई। अब चूंकि 19 विभागों और 34 प्रकोष्ठों में राज्य से लेकर जिला स्तर तक नियुक्तियां होनी हैं, इसलिए संगठन हर कदम बेहद सावधानी से उठा रहा है ताकि किसी असंतोष से बचा जा सके।
👥 समन्वय समिति की होगी अहम भूमिका: विकेंद्रीकरण और सभी की भागीदारी पर जोर
नई व्यवस्था के तहत जिला स्तर पर होने वाली हर नियुक्ति से पहले वहां की समन्वय समिति से नामों पर विचार कराया जाएगा। इस समिति में क्षेत्र के सभी विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, जिला और ब्लॉक पंचायत अध्यक्ष, महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष व अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होते हैं। समिति हर नाम पर बारीकी से विचार करने के बाद सूची प्रदेश मुख्यालय को भेजती है। प्रदेश संगठन महासचिव संजय कामले का कहना है कि पार्टी व्यवस्था का विकेंद्रीकरण कर रही है, जिससे हर निर्णय में सबकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। जल्द ही प्रदेश कार्यकारिणी में बदलाव कर एक संतुलित टीम बनाई जाएगी जिसमें क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन के साथ युवाओं व अनुभवी नेताओं का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलेगा।
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