50 करोड़ के भोपाल आईएसबीटी में कीचड़ और गंदगी का अंबार, पीने के पानी और टॉयलेट के लिए भटक रहे यात्री
भोपाल के 50 करोड़ की लागत से बने आईएसबीटी बस स्टैंड पर गंदगी, कीचड़ और पेयजल संकट से यात्री परेशान हैं। रोजाना 25 हजार से अधिक लोग यहां आते हैं।
राजधानी भोपाल के अंतरराज्यीय बस अड्डे (ISBT) पर रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर बसें खड़ी होती हैं, वहां बारिश के बाद घुटने तक पानी और कीचड़ भरा रहता है, जबकि बस स्टैंड से बाहर निकलने वाले मार्गों पर कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस आधुनिक टर्मिनल पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। इसके अलावा, परिसर में लगे नल और टोंटियां खराब होने के कारण यात्रियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूरी में 20 रुपये की पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है।
💧 पीने के पानी के लिए तरसे यात्री, टॉयलेट और बेबी फीडिंग रूम भी बंद
रोजाना लगभग 25 हजार यात्रियों की आवाजाही वाले इस बड़े बस अड्डे पर बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। इनमें करीब 40 प्रतिशत महिला यात्री शामिल हैं, लेकिन उनके लिए बनाए गए स्मार्ट टॉयलेट और बेबी फीडिंग रूम संचालन के अभाव में ताले में बंद पड़े हैं। चालू शौचालयों की हालत इतनी बदतर है कि वहां कुछ पल टिकना भी मुश्किल है और गंदगी के कारण बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था ठप होने के कारण यात्रियों को जेब ढीली करके महंगा बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
💰 बसों से हर महीने वसूला जाता है लाखों का शुल्क, फिर भी सुविधाएं सिफर
आईएसबीटी से रोजाना 500 से अधिक बसों का संचालन किया जाता है, जिसके एवज में नगर निगम मेंटेनेंस के नाम पर हर बस से 40 रुपये प्रवेश शुल्क वसूलता है। इस हिसाब से केवल बस एंट्री से ही हर महीने 4 से 5 लाख रुपये तक की कमाई होती है, लेकिन इसके बावजूद सफाई, पेयजल, लाइटिंग और यात्रियों के लिए पूछताछ केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। अनाउंसमेंट और किराया सूची के अभाव में यात्रियों को अक्सर बसों के रूट और समय की जानकारी के लिए भटकना पड़ता है।
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