वित्त मंत्रालय ने शुरू की बजट 2027 की तैयारियां, 12 अक्टूबर से शुरू होंगी प्री-बजट बैठकें

वित्त मंत्रालय ने बजट 2027 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 12 अक्टूबर से प्री-बजट बैठकें शुरू होंगी और सरकार का फोकस खर्च नियंत्रण पर रहेगा।

Aug 29, 2026 - 17:13
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वित्त मंत्रालय ने शुरू की बजट 2027 की तैयारियां, 12 अक्टूबर से शुरू होंगी प्री-बजट बैठकें

आगामी केंद्रीय बजट 2027 की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। वित्त मंत्रालय ने देश के सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि वे अगले वित्त वर्ष के लिए अपने संभावित खर्च और कमाई का वास्तविक अनुमान तैयार करें। सरकार का इस बार मुख्य फोकस सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने, चल रही योजनाओं की गहन समीक्षा करने और गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) को बढ़ाने पर रहेगा। मंत्रालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बजट का आवंटन पूरी पारदर्शिता और सटीकता के साथ किया जाए ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे।

📅 12 अक्टूबर से शुरू होंगी प्री-बजट बैठकें, 6 अक्टूबर तक देनी होगी जानकारी

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बजट सर्कुलर के मुताबिक, आगामी वित्त वर्ष के लिए प्री-बजट बैठकें 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर नवंबर के मध्य तक चलेंगी। इन महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता व्यय सचिव (Expenditure Secretary) द्वारा की जाएगी। सभी मंत्रालयों को अपने बजट से जुड़ी आवश्यक जानकारी 6 अक्टूबर तक पोर्टल पर जमा करनी होगी, जबकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से होने वाली आय का अनुमान 15 अक्टूबर तक देना अनिवार्य किया गया है। दिशा-निर्देशों के अनुसार, मंत्रालयों को सबसे पहले उन वित्तीय प्रतिबद्धताओं और खर्चों के लिए प्रावधान करना होगा जो पहले से संचालित हैं या जिन्हें पूरा करना बेहद आवश्यक है, उसके बाद ही किसी नई योजना के लिए राशि की मांग की जा सकेगी।

🔍 पुरानी योजनाओं की होगी सख्त समीक्षा, गैर-कर आय बढ़ाने पर रहेगा विशेष फोकस

सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो योजनाएं पहले ही बंद हो चुकी हैं, उन्हें संशोधित अनुमानों में शामिल न किया जाए। इसके अलावा, जो योजनाएं वित्त वर्ष 2026-27 के बाद आगे जारी नहीं रखी जानी हैं, उनके लिए बजट 2027-28 में किसी भी प्रकार का फंड आवंटित नहीं किया जाएगा। सरकार यह भी चाहती है कि वित्तीय वर्ष के अंत में भारी-भरकम राशि बिना खर्च किए सरेंडर न करनी पड़े, और यदि किसी अनुदान में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बचत होती है, तो उसका ठोस कारण बताना होगा। इसके साथ ही, सेवाओं के यूजर चार्ज, पेंडिंग बकायों और अन्य गैर-कर आय स्रोतों की समीक्षा की जा रही है ताकि सरकारी सेवाओं की लागत का उचित रिटर्न मिल सके।

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