मध्य प्रदेश से दिल्ली पहुंचे शिक्षकों ने भरी हुंकार, कहा—मांग पूरी न होने पर होगा राष्ट्रव्यापी आंदोलन

टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के शिक्षकों ने दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का प्रदर्शन किया है। जानिए पूरी खबर।

Aug 31, 2026 - 10:03
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मध्य प्रदेश से दिल्ली पहुंचे शिक्षकों ने भरी हुंकार, कहा—मांग पूरी न होने पर होगा राष्ट्रव्यापी आंदोलन

मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों से अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुँचे हजारों शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को तुरंत समाप्त करने की पुरजोर मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को इस व्यवस्था को खत्म करने के लिए संसद में विधेयक लाना चाहिए। जंतर-मंतर पर औपचारिक प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के कारण, रविवार को दिल्ली के केशवपुरम स्थित जाट धर्मशाला में 'ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट इंडिया' के बैनर तले एक बड़े राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन और कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से आए करीब पांच हजार से अधिक शिक्षक शामिल हुए।

⚠️ अनुभवी शिक्षकों पर टीईटी थोपना उनके सम्मान का अपमान—मुख्य राष्ट्रीय संयोजक जगदीश यादव

कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के शिक्षक और ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट इंडिया के मुख्य राष्ट्रीय संयोजक जगदीश यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो शिक्षक वर्षों से लगातार शिक्षण कार्य कर रहे हैं और अपनी सेवा दे रहे हैं, उन अनुभवी शिक्षकों पर अचानक टीईटी की अनिवार्यता थोपना उनके वर्षों के अनुभव, मान-सम्मान और सेवा का सीधा अपमान है। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह अवांछित व्यवस्था जल्द समाप्त नहीं की गई, तो देशव्यापी स्तर पर जिला, प्रांत और राष्ट्रीय स्तर पर और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा।

🚫 दिल्ली जा रहे मध्य प्रदेश के शिक्षकों को रोके जाने और थानों में बैठाए जाने का गंभीर आरोप

इस राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान आयोजकों ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए। जगदीश यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली के इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे मध्य प्रदेश के करीब सात हजार शिक्षकों को रास्ते में ही अलग-अलग जिलों की पुलिस द्वारा रोक लिया गया। कई स्थानों पर शिक्षकों को जबरन थानों में बैठाए जाने की भी सूचना मिली। उन्होंने इसे शिक्षकों की बुलंद होती आवाज को दबाने का एक कुत्सित प्रयास और उनके मौलिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन करार दिया है।

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