जयारोग्य अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में रचा गया इतिहास, अब दिल्ली-इंदौर जाने की जरूरत नहीं

ग्वालियर-चंबल अंचल में पहली बार सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सफल किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। 55 साल की पत्नी ने अपने पति को किडनी देकर नया जीवन दिया है।

Aug 31, 2026 - 10:23
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जयारोग्य अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में रचा गया इतिहास, अब दिल्ली-इंदौर जाने की जरूरत नहीं

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के चिकित्सा इतिहास में रविवार का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है। ग्वालियर-चंबल अंचल में पहली बार किसी मरीज का सफल किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन किया गया है। एक 55 वर्षीय पत्नी ने अपने 60 वर्षीय बीमार पति के लिए 'सावित्री' बनकर उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाल लाई है। इस अभूतपूर्व सफलता के बाद अब अंचल के मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट जैसे जटिल उपचार के लिए दिल्ली, मुंबई या इंदौर के महंगे चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि उन्हें यह अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा अब अपने ही शहर ग्वालियर में सुलभ हो गई है, जिससे मरीजों के समय और धन दोनों की भारी बचत होगी।

⏳ छह घंटे तक चला जटिल ऑपरेशन, दिल्ली से आए विशेषज्ञों और स्थानीय डॉक्टरों ने मिलकर रचा इतिहास

जानकारी के अनुसार, मूल रूप से छतरपुर के रहने वाले 60 वर्षीय बुजुर्ग कृष्णकांत गुप्ता की दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं और वे केवल 10 प्रतिशत क्षमता पर ही काम कर रही थीं। उनका इलाज ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल समूह (JAH) के अंतर्गत आने वाले सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में चल रहा था। जब डोनर की तलाश शुरू हुई तो मरीज की पत्नी मीरा ने अपने पति की जान बचाने के लिए अपनी एक किडनी देने का साहसिक फैसला किया। सभी जरूरी कानूनी और मेडिकल प्रोटोकॉल पूरे करने के बाद रविवार सुबह साढ़े आठ बजे सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सर्जरी शुरू हुई। नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों की टीम ने मणिपाल हॉस्पिटल के यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन के नेतृत्व में करीब साढ़े छह घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन को दोपहर 3 बजे पूरी तरह सफलतापूर्वक संपन्न किया।

🛡️ संक्रमण से बचाव के लिए बनाया गया स्पेशल आईसीयू, एक हफ्ते तक डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे मरीज और डोनर

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की इंचार्ज डॉ. नीलिमा टंडन ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद संक्रमण (Infection) के खतरे को रोकने के लिए मरीज कृष्णकांत गुप्ता के वास्ते एक विशेष और सुरक्षित आईसीयू वार्ड तैयार किया गया है, जहाँ केवल अधिकृत चिकित्सा स्टाफ को ही जाने की अनुमति है। फिलहाल डोनर और रिसीवर दोनों को अगले सात दिनों तक मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की विशेष निगरानी में ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा, ताकि नई बॉडी में ऑर्गन के रिस्पांस और अंदरूनी घावों की रिकवरी पर पूरी नजर रखी जा सके। इस पहली सफल सर्जरी ने ग्वालियर के मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को एक नई ऊँचाई दी है।

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