मुख्यमंत्री को सौंपा गया 12 सूत्रीय ज्ञापन, जातियों के आरक्षण और जाति प्रमाण पत्र से क्षेत्रीय बंधन हटाने की मांग

उज्जैन में घुमंतु और विमुक्त समुदायों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में जल, जंगल, जमीन और आरक्षण समेत कई मुद्दों पर चर्चा कर 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया।

Aug 31, 2026 - 17:54
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मुख्यमंत्री को सौंपा गया 12 सूत्रीय ज्ञापन, जातियों के आरक्षण और जाति प्रमाण पत्र से क्षेत्रीय बंधन हटाने की मांग

शुरुआती दौर से ही सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे घुमंतु, अर्धघुमन्तु और विमुक्त समुदायों को एक मंच पर एकजुट करने के उद्देश्य से उज्जैन में एक भव्य दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। 30 और 31 अगस्त को आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए 71 समुदायों के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान इन समुदायों की एकता, संवैधानिक अधिकारों और भविष्य की रणनीतियों पर गंभीर मंथन किया गया। सम्मेलन में जल, जंगल, जमीन, आवास, आरक्षण, जाति प्रमाण पत्र, शिक्षा, रोजगार, धर्मांतरण, पलायन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे बुनियादी मुद्दों को प्रमुखता के साथ उठाया गया।

🤝 बिखरे समाज को एक सूत्र में पिरोने की मुहिम, अखिल भारतीय आदिम महासंघ ने उठाई आवाज

अखिल भारतीय आदिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूप सिंह भरभड़िया ने कहा कि संगठन का मुख्य प्रयास देशभर में बिखरे हुए 70 से अधिक समुदायों को एक मंच पर लाना और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इन समुदायों का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी स्थायी आवास, उपजाऊ भूमि, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर है। संगठन पूरे देश में समाज को जोड़ने का अभियान चला रहा है, ताकि शिक्षा, सरकारी नौकरियों और सत्ता में समुचित भागीदारी के साथ-साथ संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का वास्तविक लाभ इन वंचित वर्गों तक पहुँच सके।

📜 मुख्यमंत्री को सौंपा गया 12 सूत्रीय ज्ञापन, विमुक्ति दिवस पर उठी आरक्षण और पुनर्वास की मांग

महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1871 में 'क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट' लागू किया गया था, जिसके चलते कई समुदायों को अवांछित रूप से अपराधी मान लिया गया था। इसी काले कानून से 31 अगस्त 1952 को मुक्ति मिलने की स्मृति में ये समुदाय इस दिन को 'विमुक्ति दिवस' के रूप में मनाते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के नाम एक 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास, बंजर भूमि पर बसावट, और छात्र-छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र से क्षेत्रीय बंधन को समाप्त करने की मांग प्रमुख रही। इसके साथ ही पारधी और शिकारी समुदायों को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने तथा मूल जाति के आधार पर योजनाओं का लाभ देने या 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग भी उठाई गई।

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