सीधी जिला प्रदेश में अव्वल, भोपाल और इंदौर पिछड़े, कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर साधा निशाना
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश का एक भी जिला स्कूली शिक्षा में 60 प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर सका है। सीधी पहले और झाबुआ अंतिम स्थान पर है।
मध्य प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के दावों की केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट ने पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के सभी 55 जिलों में से एक भी जिला 600 में से 360 अंक यानी 60 प्रतिशत का स्तर भी पार नहीं कर पाया है। हालांकि, सीधी जिला 333 अंकों के साथ पूरे प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला रहा, लेकिन वह भी निर्धारित मानक से 27 अंक पीछे है। इसके विपरीत, राजधानी भोपाल को 285 और आर्थिक राजधानी इंदौर को 284 अंक मिले हैं, जबकि झाबुआ 226 अंकों के साथ इस सूची में सबसे नीचे है। राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश 1000 में से 566.8 अंक पाकर देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 27वें पायदान पर है।
🏛️ छोटे जिलों ने बड़े शहरों को पछाड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
इस रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कई छोटे जिलों ने भोपाल और इंदौर जैसे बड़े और विकसित शहरों को पीछे छोड़ दिया है। सीधी के बाद उज्जैन (323), शाजापुर (318), दमोह (312), नरसिंहपुर (307), सागर (301) और नीमच (299) अंकों के साथ आगे रहे, जबकि ग्वालियर 277 और जबलपुर को मात्र 267 अंक ही मिले। इस खराब प्रदर्शन को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब एक भी जिला 60 प्रतिशत तक नहीं पहुँच पाया, तो सरकार के शिक्षा के बड़े-बड़े दावों की पोल खुलना स्वाभाविक है। पटवारी ने डिजिटल शिक्षा, स्कूल सुरक्षा और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर पर चिंता जताते हुए सरकार से ठोस सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
📊 देश के अग्रणी राज्यों से काफी पीछे मध्य प्रदेश, 45 जिले 'प्रयास-2' श्रेणी में शामिल
राष्ट्रीय स्तर पर तुलना करने पर पता चलता है कि पंजाब (723.6 अंक) और केरल (716.8 अंक) जैसे राज्य इस मामले में काफी आगे हैं, जबकि महाराष्ट्र (654.6) और ओडिशा (651.5) भी बेहतर स्थिति में हैं। पड़ोसी राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश (579.9) और छत्तीसगढ़ (578.9) भी मध्य प्रदेश से ऊपर हैं, जबकि बिहार (564.8) थोड़ा पीछे है। जिला स्तर पर प्रदर्शन के आधार पर प्रदेश के 6 जिलों को 'प्रयास-1', 45 जिलों को 'प्रयास-2' और 4 जिलों को 'प्रयास-3' श्रेणी में रखा गया है। इस व्यापक रिपोर्ट में विद्यार्थियों के लर्निंग लेवल, स्कूल सुविधाओं, सुरक्षा, डिजिटल शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पैमानों को शामिल किया गया था, जो यह दर्शाते हैं कि एमपी को शिक्षा के क्षेत्र में अभी लंबी दूरी तय करनी है।
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