आपसी विवाद और घरेलू हिंसा रोकने के लिए समाज ने बनाई कमेटी, आपसी सुलह से सुलझेंगे मामले
छिंदवाड़ा में मेहरा डेहरिया समाज ने कोर्ट-कचहरी के चक्कर से बचने के लिए परिवार परामर्श संगठन का गठन किया है। अब आपसी विवाद और घरेलू हिंसा के मामले समाज स्तर पर सुलझाए जाएंगे।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में मेहरा डेहरिया समाज ने एक ऐतिहासिक और सराहनीय कदम उठाया है। अब घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और पति-पत्नी के बीच मनमुटाव या आपसी विवाद जैसे मामलों के लिए समाज के लोगों को पुलिस थानों और कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। समाज के पदाधिकारियों ने यह दावा किया है कि वे अदालतों के लंबे और खर्चीले चक्करों से बचने के लिए ऐसे मामलों का निपटारा अब समाज के दायरे में ही आपसी सहमति से करेंगे, जिससे न केवल परिवारों का बिखराव रोका जा सकेगा बल्कि अनावश्यक आर्थिक खर्च और सामाजिक बदनामी से भी बचा जा सकेगा।
👥 परिवार परामर्श संगठन का हुआ गठन, 10 सदस्यीय समिति में 5 महिलाएं और 5 पुरुष होंगे शामिल
कुसमेली स्थित सामाजिक भवन में आयोजित जिला स्तरीय बैठक के दौरान समाज हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिला सचिव दिनेश डेहरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि समाज ने 'परिवार परामर्श संगठन' का गठन किया है, जिसमें कुल 10 सदस्य शामिल किए गए हैं। इस समिति में 5 महिला और 5 पुरुष सदस्यों को जगह दी गई है, जिसमें समाज के वरिष्ठ और समझदार लोगों के साथ-साथ कानून के जानकार भी शामिल होंगे। बैठक के दौरान सामाजिक भवन के निर्माण कार्य को गति देने और जिला अध्यक्ष गोपाल डेहरिया को आधिकारिक रूप से नया प्रभार सौंपने की रूपरेखा भी तैयार की गई।
📊 जिले में डेहरिया मेहरा समाज की है सवा लाख आबादी, परासिया और अमरवाड़ा में बहुलता
छिंदवाड़ा जिले में डेहरिया मेहरा समाज की अच्छी खासी आबादी है, जो करीब सवा लाख के आसपास बताई जाती है। जिले में सबसे ज्यादा मेहरा समाज के लोग परासिया विधानसभा क्षेत्र में निवास करते हैं, इसके बाद अमरवाड़ा, जुन्नारदेव और छिंदवाड़ा शहरी क्षेत्रों में इनकी बड़ी संख्या है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब पारिवारिक मामले पुलिस या कोर्ट में जाते हैं, तो न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं और दोनों पक्षों की भारी धन-दौलत बर्बाद होती है। इसी फिजूलखर्च और सामाजिक बदनामी से बचने के लिए यह संगठन बनाया गया है, ताकि आपसी संवाद और सूझबूझ से टूटते हुए रिश्तों को बचाया जा सके।
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