मोहन यादव कैबिनेट की सिफारिश पर राज्यपाल ने लगाई मुहर, अब कोर्ट में दाखिल होगी क्लोजर रिपोर्ट

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को बड़ी राहत मिली है। राज्यपाल ने अभियोजन की मंजूरी नहीं दी है, जिससे अब क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होगी।

Sep 01, 2026 - 10:11
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मोहन यादव कैबिनेट की सिफारिश पर राज्यपाल ने लगाई मुहर, अब कोर्ट में दाखिल होगी क्लोजर रिपोर्ट

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह को ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में एक बहुत बड़ी राहत मिल गई है। राज्य की मोहन यादव कैबिनेट ने मंत्री विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा या अभियोजन न चलाने की आधिकारिक अनुशंसा की थी, जिस पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी अपनी मुहर लगा दी है। इससे पहले बीते 25 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में अभियोजन की अनुमति न देने का प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल के पास भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल चुकी है।

📋 सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी सुनवाई, अभियोजन मंजूरी न मिलने पर अब बनेगी क्लोजर रिपोर्ट

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की थी। सुनवाई में यह स्पष्ट किया गया था कि यदि सरकार या राज्यपाल की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है, तो संबंधित सक्षम अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। चूंकि अब राज्यपाल के स्तर से अभियोजन की अनुमति प्रदान नहीं की गई है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत इस मामले में अब अंतिम रूप से क्लोजर रिपोर्ट पेश किए जाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

⚖️ कैबिनेट बैठक में चार बार मांगी गई माफी को बनाया गया आधार, 11 मई 2025 को दिया गया था बयान

कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों ने इस बात पर विशेष रूप से विचार किया था कि मंत्री विजय शाह इस विवादित प्रकरण में सार्वजनिक मंचों पर और लिखित रूप में कुल चार बार अपनी गलती मानकर माफी मांग चुके हैं। सरकार का यह तर्क रहा कि मंत्री की मंशा देश की सेना या किसी भी महिला अधिकारी का अपमान करने की कतई नहीं थी, इसलिए अब उनके खिलाफ कानूनी मुकदमा चलाने का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं बचता है। कानूनी विशेषज्ञों से विधिक सलाह लेने के बाद ही राज्यपाल को यह अनुशंसा भेजी गई थी। ज्ञात हो कि यह पूरा विवाद 11 मई 2025 को महू में दिए गए एक भाषण के बाद शुरू हुआ था।

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